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मोस्टामानू मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब
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मोस्टामानू मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते कलाकार। संवाद
- फोटो : PITHORAGARH
पिथौरागढ़। सोरघाटी और गौरंग देश के सुप्रसिद्ध मोस्टामानू मेले में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। सैकड़ों लोगों ने मां भगवती और मोस्टा देवता का आशीर्वाद लिया। सुबह से लेकर देर शाम तक मेला परिसर श्रद्धालुओं से पटा रहा। इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता के इंतजाम रहे।
मेले को लेकर सोर और गौरंग घाटी के दर्जनों गांवों में सुबह से ही उत्साह था। सुबह नौ बजे से ग्रामीण और नगरवासी मोस्टामानू मंदिर में एकत्र होने लगे। मौसम साफ होने से दोपहर बाद मां भगवती सहित अन्य डोले निकाले गए। मंदिर की परिक्रमा के बाद डोले में सवार देव डंगरिये पर लोक देवता का अवतरण हुआ। लोगों ने फूल और अक्षत से उनकी पूजा कर क्षेत्र के कल्याण की कामना की।
इस दौरान सैम, लाटा, कालसिन और अन्य देवताओं का अवतरण हुआ जिनसे लोगों ने आशीर्वाद लिया। मेले में सुरक्षा के लिए काफी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। टैक्सियों को मेला स्थल से दो किलोमीटर दूर चंडाक से आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई थी।
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पत्थर उठाने के लिए उमड़ी भीड़
पिथौरागढ़। मंदिर परिसर में रखे गए भारी-भरकम पत्थर को उठाने के लिए युवाओं में खासा उत्साह दिखा। माना जाता है कि इस पत्थर को उठाने वाले को मोस्टा देवता का आशीर्वाद मिलता है। पत्थर उठाने में कई युवा सफल हुए तो कुछ को निराशा हाथ लगी। संवाद
मेले में नहीं दिखे कृषि यंत्र
पिथौरागढ़। कुछ वर्षों पहले तक मोस्टामानू मेले में कृषि यंत्रों की खूब बिक्री होती थी। ग्रामीण इन यंत्रों की खरीद करते थे लेकिन इस वर्ष कृषि यंत्र नहीं दिखाई दिए जिसका कारण क्षेत्र में कम होता जा रहा खेती का रकबा माना जा रहा है। संवाद
आलू-रायते की जगह चाऊमीन ने ली
पिथौरागढ़। मोस्टामानू मेला आलू, रायते के लिए प्रसिद्ध रहा है। इधर अब समय के साथ परंपरा बदल चुकी है। आलू-रायते के स्थान पर इस बार चाऊमीन की दुकानें अधिक नजर आई जहां पर मेलार्थियों का तांता लगा रहा। मेले में जलेबी आदि की दुुकानें भी लगी रही। संवाद
मेले में दूसरे दिन रंगारंग कार्यक्रमों की धूम
पिथौरागढ़। मोस्टामानू मेले में दूसरे दिन भी रंगारंग कार्यक्रमों की धूम रही। कार्यक्रमों का शुभारंभ डीडीहाट विधायक बिशन सिंह चुफाल और स्थानीय विधायक मयूख महर ने किया। कार्यक्रम में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित बसंती देवी भी मौजूद रही। मेले में जीआईसी पिथौरागढ़ समेत विभिन्न स्कूलों के बच्चों ने कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस दौरान अल्मोड़ा से आई संस्कार टीम के कलाकारों ने सांस्कृतिक रंग बिखेरे। कैलाश कुमार, नवीन भट्ट, दीपिका राज, प्रकाश रावत, नारायण सोराड़ी, सुरेश प्रसाद सुरीला के गीतों पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाई। संवाद
स्टाल लगाकर दी सरकारी योजनाओं की जानकारी
पिथौरागढ़। मेले में विभिन्न विभागों की ओर से स्टाल लगाकर लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। इस मौके पर मेला अध्यक्ष भगवान सिंह बिष्ट, संरक्षक भूपेश पंत, मेला सहसंयोजक प्रकाश जोशी, मनोज सामंत, दामोदर भट्ट, मुकेश पंत, महेंद्र लुंठी, मंजू बिष्ट, जसवंत सिंह बिष्ट, लीलाम्बर गुरुरानी, मिलाप सिंह बिष्ट, गोविंद सिंह बिष्ट, एनडी कांडपाल, राम सिंह, हर सिंह बिष्ट, गणेश कांडपाल, त्रिलोक सिंह बिष्ट, सुभाष फुलेरा, मनोज बिष्ट, पंकज बिष्ट, जगदीश फुलेरा, हयात तड़ागी, कमल पुनेड़ा, शमशेर महर, पप्पू बिष्ट, मोनू चौसाली, मेजर ललित सामंत, विनोद देवलाल मौजूद रहे। संचालन दीवान सिंह वल्दिया, जनार्दन उप्रेती, ललित शौर्य ने किया। संवाद
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मेले को लेकर सोर और गौरंग घाटी के दर्जनों गांवों में सुबह से ही उत्साह था। सुबह नौ बजे से ग्रामीण और नगरवासी मोस्टामानू मंदिर में एकत्र होने लगे। मौसम साफ होने से दोपहर बाद मां भगवती सहित अन्य डोले निकाले गए। मंदिर की परिक्रमा के बाद डोले में सवार देव डंगरिये पर लोक देवता का अवतरण हुआ। लोगों ने फूल और अक्षत से उनकी पूजा कर क्षेत्र के कल्याण की कामना की।
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इस दौरान सैम, लाटा, कालसिन और अन्य देवताओं का अवतरण हुआ जिनसे लोगों ने आशीर्वाद लिया। मेले में सुरक्षा के लिए काफी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। टैक्सियों को मेला स्थल से दो किलोमीटर दूर चंडाक से आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई थी।
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पत्थर उठाने के लिए उमड़ी भीड़
पिथौरागढ़। मंदिर परिसर में रखे गए भारी-भरकम पत्थर को उठाने के लिए युवाओं में खासा उत्साह दिखा। माना जाता है कि इस पत्थर को उठाने वाले को मोस्टा देवता का आशीर्वाद मिलता है। पत्थर उठाने में कई युवा सफल हुए तो कुछ को निराशा हाथ लगी। संवाद
मेले में नहीं दिखे कृषि यंत्र
पिथौरागढ़। कुछ वर्षों पहले तक मोस्टामानू मेले में कृषि यंत्रों की खूब बिक्री होती थी। ग्रामीण इन यंत्रों की खरीद करते थे लेकिन इस वर्ष कृषि यंत्र नहीं दिखाई दिए जिसका कारण क्षेत्र में कम होता जा रहा खेती का रकबा माना जा रहा है। संवाद
आलू-रायते की जगह चाऊमीन ने ली
पिथौरागढ़। मोस्टामानू मेला आलू, रायते के लिए प्रसिद्ध रहा है। इधर अब समय के साथ परंपरा बदल चुकी है। आलू-रायते के स्थान पर इस बार चाऊमीन की दुकानें अधिक नजर आई जहां पर मेलार्थियों का तांता लगा रहा। मेले में जलेबी आदि की दुुकानें भी लगी रही। संवाद
मेले में दूसरे दिन रंगारंग कार्यक्रमों की धूम
पिथौरागढ़। मोस्टामानू मेले में दूसरे दिन भी रंगारंग कार्यक्रमों की धूम रही। कार्यक्रमों का शुभारंभ डीडीहाट विधायक बिशन सिंह चुफाल और स्थानीय विधायक मयूख महर ने किया। कार्यक्रम में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित बसंती देवी भी मौजूद रही। मेले में जीआईसी पिथौरागढ़ समेत विभिन्न स्कूलों के बच्चों ने कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस दौरान अल्मोड़ा से आई संस्कार टीम के कलाकारों ने सांस्कृतिक रंग बिखेरे। कैलाश कुमार, नवीन भट्ट, दीपिका राज, प्रकाश रावत, नारायण सोराड़ी, सुरेश प्रसाद सुरीला के गीतों पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाई। संवाद
स्टाल लगाकर दी सरकारी योजनाओं की जानकारी
पिथौरागढ़। मेले में विभिन्न विभागों की ओर से स्टाल लगाकर लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। इस मौके पर मेला अध्यक्ष भगवान सिंह बिष्ट, संरक्षक भूपेश पंत, मेला सहसंयोजक प्रकाश जोशी, मनोज सामंत, दामोदर भट्ट, मुकेश पंत, महेंद्र लुंठी, मंजू बिष्ट, जसवंत सिंह बिष्ट, लीलाम्बर गुरुरानी, मिलाप सिंह बिष्ट, गोविंद सिंह बिष्ट, एनडी कांडपाल, राम सिंह, हर सिंह बिष्ट, गणेश कांडपाल, त्रिलोक सिंह बिष्ट, सुभाष फुलेरा, मनोज बिष्ट, पंकज बिष्ट, जगदीश फुलेरा, हयात तड़ागी, कमल पुनेड़ा, शमशेर महर, पप्पू बिष्ट, मोनू चौसाली, मेजर ललित सामंत, विनोद देवलाल मौजूद रहे। संचालन दीवान सिंह वल्दिया, जनार्दन उप्रेती, ललित शौर्य ने किया। संवाद