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Pithoragarh News: नाबालिग से छेड़छाड़ के दोषी को पांच साल के कठोर कारावास की सजा
Tue, 14 May 2024 10:46 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Tue, 14 May 2024 10:46 PM IST
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पिथौरागढ़। विशेष सत्र न्यायाधीश पॉक्सो ने नाबालिग से छेड़छाड़ के दोषी को पांच साल के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
मामले में 31 जुलाई 2019 को धारचूला के रांथी गांव निवासी महेश परियार ने धारचूला बाजार में शटर बंद कर टेलरिंग शॉप में बैठी 14 वर्ष की नाबालिग के साथ छेड़छाड़ की थी। नाबालिग के विरोध करने पर वह दुपट्टे से गला बांधकर मौके से भाग गया। जब परिजन दुकान में पहुंचे तो नाबालिग बेहोश थी। नाबालिग के होश में आने पर उसने आपबीती बताई। पीड़िता के परिजनों की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ धारचूला थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। यह मामला न्यायालय में चला।
विशेष सत्र न्यायाधीश पॉक्सो शंकर राज ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद दोष सिद्ध करार देते हुए अभियुक्त महेश परियार को आईपीसी की धारा 506 के तहत पांच वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड नहीं देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा-8 के अपराध के लिए पांच वर्ष के कठोर कारावास और 40 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई।
अर्थदंड न देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। दोष सिद्ध की दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। यदि दोष सिद्ध जुर्माने की धनराशि जमा करता है तो इस राशि में से 40 हजार रुपये पीड़िता को प्रतिकर के रूप में दी जाएगी। मामले की पैरवी डीजीसी फौजदारी प्रमोद पंत और एडीजीसी प्रेम भंडारी ने की।
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मामले में 31 जुलाई 2019 को धारचूला के रांथी गांव निवासी महेश परियार ने धारचूला बाजार में शटर बंद कर टेलरिंग शॉप में बैठी 14 वर्ष की नाबालिग के साथ छेड़छाड़ की थी। नाबालिग के विरोध करने पर वह दुपट्टे से गला बांधकर मौके से भाग गया। जब परिजन दुकान में पहुंचे तो नाबालिग बेहोश थी। नाबालिग के होश में आने पर उसने आपबीती बताई। पीड़िता के परिजनों की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ धारचूला थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। यह मामला न्यायालय में चला।
विशेष सत्र न्यायाधीश पॉक्सो शंकर राज ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद दोष सिद्ध करार देते हुए अभियुक्त महेश परियार को आईपीसी की धारा 506 के तहत पांच वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड नहीं देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा-8 के अपराध के लिए पांच वर्ष के कठोर कारावास और 40 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई।
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अर्थदंड न देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। दोष सिद्ध की दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। यदि दोष सिद्ध जुर्माने की धनराशि जमा करता है तो इस राशि में से 40 हजार रुपये पीड़िता को प्रतिकर के रूप में दी जाएगी। मामले की पैरवी डीजीसी फौजदारी प्रमोद पंत और एडीजीसी प्रेम भंडारी ने की।
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