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नंदा मंदिरों में मेले की धूम
उजाला ब्यूरो चंपावत।
Updated Mon, 17 Sep 2018 11:14 PM IST
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मुनस्यारी के डाडाधार में लगे नंदा मेले में जुटा लोगों का हुजूम।
- फोटो : अमर उजाला
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विभिन्न क्षेत्रों में नंदा देवी मेले की धूम रही। डंाधार और सुरिंग के नंदा देवी मंदिर में लगने वाला मेला काफी प्रसिद्ध है। क्षेत्र के लोग ब्रह्मकमल पुष्प लेने तीन दिन पहले उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित नंदाकुंड रवाना हो गए थे।
सोमवार को लोगों ने ब्रह्मकमल नंदा देवी के मंदिरों में चढ़ाया। मंदिरों में ब्रह्मकमल पुष्प चढ़ाने के बाद ही मेला प्रारंभ होता है। सुरिंग और डाडाधार में लगे मेलों में कई लोगों ने शिरकत की। रांथी, बसंतकोट, चुलकोट के नंदा देवी मंदिर में लगे मेले में सुबह से ही लोगों का जुटना शुरू हो गया था। नंदा मेले के दौरान महिलाओं ने चांचरी गायन किया।
मेले में काफी संख्या में दुकानें लगी हुई थी। बाहर से भी व्यापारी मेले में पहुंचे हुए थे। लोगों ने देर शाम तक मेले में खरीददारी की। मुनस्यारी के साथ ही तल्ला जोहार के बिर्थी, सैंणराथी, होकरा, समकोट, कोटा क्षेत्र के लोग नंदा कुंड ब्रह्मकमल लाने जाते हैं। रास्ते में पड़ाव न होने के कारण इन लोगों को रात गुफाओं में बितानी पड़ती है।
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सोमवार को लोगों ने ब्रह्मकमल नंदा देवी के मंदिरों में चढ़ाया। मंदिरों में ब्रह्मकमल पुष्प चढ़ाने के बाद ही मेला प्रारंभ होता है। सुरिंग और डाडाधार में लगे मेलों में कई लोगों ने शिरकत की। रांथी, बसंतकोट, चुलकोट के नंदा देवी मंदिर में लगे मेले में सुबह से ही लोगों का जुटना शुरू हो गया था। नंदा मेले के दौरान महिलाओं ने चांचरी गायन किया।
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मेले में काफी संख्या में दुकानें लगी हुई थी। बाहर से भी व्यापारी मेले में पहुंचे हुए थे। लोगों ने देर शाम तक मेले में खरीददारी की। मुनस्यारी के साथ ही तल्ला जोहार के बिर्थी, सैंणराथी, होकरा, समकोट, कोटा क्षेत्र के लोग नंदा कुंड ब्रह्मकमल लाने जाते हैं। रास्ते में पड़ाव न होने के कारण इन लोगों को रात गुफाओं में बितानी पड़ती है।
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