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फंड मिलने के बाद भी नहीं घूमे आपातकालीन सेवा के पहिये
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Wed, 17 Oct 2018 10:44 PM IST
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पिथौरागढ़ महिला अस्पताल में भर्ती धारचूला की दीपा
- फोटो : अमर उजाला
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फंड रिलीज होने के बाद भी सीमांत जनपद में 108 और खुशियों की सवारियों के पहिये नहीं घूमे हैं। प्रसव कराने के लिए जिला अस्पताल पहुंच रहे दूरदराज गांवों के लोग अपने रिश्तेदारों के घरों या होटलों में ठहरने को मजबूर हो रहे हैं। इससे गरीब जनता परेशान है।
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चार दिन से परिजनों के घर पर हैं दीपा के परिजन
धारचूला के छारछुम निवासी दीपा के प्रसव का समय नजदीक आने पर परिजन चार दिन पहले ही पिथौरागढ़ आ गए। दीपा के परिजनों ने बताया कि 108 में ईंधन नहीं होने की उन्हें जानकारी थी। इसे देखते हुए वह पहले ही जीप बुक कराकर पिथौरागढ़ पहुंच गए थे, ताकि प्रसव पीड़ा होने पर उसे महिला अस्पताल में भर्ती किया जा सके। उन्होंने बताया कि वे चार दिनों से अपने रिश्तेदारों के घर में रुके हैं। दीपा के परिजनों के अनुसार अब वापसी में खुशियों की सवारी मिलने का इंतजार है।
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1500 रुपये में कार बुक कर आए हैं
मूनाकोट विकासखंड के दूरस्थ दोबांस गांव से भी इसी तरह गर्भवती प्रतिभा को परिजन पहले ही जिला मुख्यालय ले आए। प्रतिभा के तीमारदारों ने बताया कि 108 नहीं होने से उन्हें 1500 रुपये में आल्टो कार बुक कराकर जिला अस्पताल आना पड़ा। बताया कि खुशियों की सवारी नहीं मिली तो फिर से जीप बुक कराकर वापस जाना पड़ेगा।
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दीपा के परिजनों ने भी लिया निजी वाहन का सहारा
108 में ईंधन नहीं होने से मूनाकोट से दीपा को भी परिजन प्रसव के लिए निजी वाहन से महिला अस्पताल लाए। दीपा के तीमारदारों ने बताया कि अस्पताल में तीन खुशियों की सवारी के वाहन खड़े हैं। अभी उनमें तेल नहीं होने की बात कही जा रही है। यदि वाहन मिले तो वापसी में उन्हें जेब से पैसे नहीं चुकाने पड़ेंगे।
पंप मालिकों का नहीं हो पाया भुगतान
पिथौरागढ़। फंड मिलने के बाद भी पिथौरागढ़ जिले में केवल थल और मुनस्यारी में ही 108 वाहनों का संचालन शुरू हो सका। पिथौरागढ़, बेड़ीनाग, गंगोलीहाट में वाहन खड़े हैं। पिथौरागढ़ के एक पंप में दो लाख रुपये का बकाया है। इस धनराशि का भुगतान हुए बिना वाहनों को तेल मिल पाना संभव नहीं है। हालांकि 108 के जिला कोआर्डिनेटर ने बुधवार की देर शाम तक भुगतान होने की बात कही है।
वाहनों की मरम्मत का बिल सात लाख
पिथौरागढ़। जिले में संचालित होने वाले 18 वाहनों की मरम्मत का बिल सात लाख रुपये है। जिला कोआर्डिनेटर प्रमोद भट्ट ने बताया कि डीजल से चलने वाले वाहनों का पांच लाख, जबकि पेट्रोल वाहनों का दो लाख का बिल था। इसमें से कंपनी की ओर से चार लाख का भुगतान किया गया है। लंबे समय से वेतन की प्रतीक्षा कर रहे 108 कर्मियों को एक माह का वेतन भी दे दिया गया है।