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तिमूर-राजमा से संवरेगी किसानों की आर्थिकी
दिनेश अवस्थी/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Sat, 02 Jun 2018 11:18 PM IST
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तिमूर
- फोटो : अमर उजाला
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किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य के बीच कृषि विभाग की कवायद रंग लाई तो शीघ्र ही सीमांत तहसील मुनस्यारी के पांच गांव तिमूर-राजमा की संयुक्त खेती से महकेंगे। कृषि विभाग ने पांच गांवों के 250 किसानों का चयन संयुक्त खेती के लिए किया है। पंचतारा होटलों में मुनस्यारी के तिमूर की मांग बढ़ने से कृषि के साथ ही एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना (आईएलएसपी) के अधिकारी भी उत्साहित हैं।
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मुनस्यारी में पूर्व से ही किसान राजमा की खेती करते आ रहे हैं। वर्तमान में राजमा को वन्य जीव काफी नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसके चलते किसानों की मेहनत बेकार हो जा रही है। अब किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य के बीच कृषि विभाग ने तिमूर और राजमा की संयुक्त खेती की कवायद शुरू कर दी है। कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी डीडीहाट अनिल कुमार ने बताया कि मुनस्यारी के बौना, तोमिक, निरतोली, गोल्फा, टांगा गांवों में प्रति गांव 50 नाली के हिसाब से 250 नाली भूमि का चयन संयुक्त खेती के लिए किया गया है।
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इन गांवों में 250 किसानों का चयन कर उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा। पहले चरण में गांवों में 250 तिमूर के पौधों का रोपण किया जाएगा। तिमूर के पौधों को खेतों के किनारे उगाया जाएगा, जिससे कि वन्य जीव राजमा को नुकसान नहीं पहुंचा सकें। तिमूर के पौधों की व्यवस्था हर्बल रिसर्च इंस्टीट्यूट गोपेश्वर से की जाएगी।
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एक क्विंटल तिमूर की है डिमांड
एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना के प्रबंधक कुलदीप बिष्ट ने बताया कि मुनस्यारी के तिमूर की गुणवत्ता काफी अच्छी है। तिमूर औषधीय पौधा है। इसका वानस्पतिक नाम ‘जिंथोकिसलियम आर्मेटम’ है। फाइव स्टार होटलों में चायनीज फूड, नॉनवेज, मॉकटेल एवं अन्य मसालों में स्वाद बढ़ाने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। आईएलएसपी ने तिमूर की मार्केटिंग के लिए दिल्ली की ई-कार्प कंपनी से संपर्क किया। वहां से फिलहाल एक क्विंटल की डिमांड मिली है। इसमें से 40 किलो तिमूर की आपूर्ति कर दी गई है।
एक हजार रुपये प्रति किलो मिल रहे हैं दाम
एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना किसानों से एक हजार रुपये प्रति किलो के हिसाब से तिमूर खरीद रही है। परियोजना ने देहरादून में ‘उत्तराहाट’ नाम से आउटलेट खोला है। इसकी पैकिंग हिमालयन तिमूर के नाम से की जा रही है। हिलांस (हाइलैंड इनोवेटिव लाइबलीहुड असेंडिंग नेचर सस्टेनिबिलिटी) के नाम से पैकिंग एवं ब्रांडिंग का कार्य किया जा रहा है।