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पहाड़ की फसलों पर अब सूखे का साया
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Wed, 18 Oct 2017 09:47 PM IST
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पिथौरागढ़ के मूनाकोट गांव में सूखे खेत में गेहूं की बुआई की तैयार करता किसान
- फोटो : अमर उजाला
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पहाड़ों पर गेहूं, जौ, मसूर की बुआई के लिए इस बार जमीन में नमी की कमी होने लगी है। 24 सितंबर के बाद बारिश की बूंद नहीं गिरी है। इस कारण सूखे के जैसे हालात पैदा होने लगे हैं। अब भी अगले एक सप्ताह तक बारिश की कोई संभावना नहीं है। इससे किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। वैसे पहाड़ों पर दिवाली के तुरंत बाद गेहूं, जौ, मसूर की बुआई होने लगती है।
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पिथौरागढ़ जिले में इस बार सितंबर में औसत से बहुत कम बारिश हुई। जिले में सितंबर में औसत बारिश की मात्रा 293 मिमी रहती है, लेकिन इस बार यह कुल मिलाकर 80 मिमी ही हो पाई। 22 से 24 सितंबर के बीच तीन दिन तक कुल 41 मिमी वर्षा हुई। उसके बाद वर्षा थम गई और इस बीच में अब तक बारिश की कोई संभावना तक नहीं बन पाई। जिले में करीब 10 फीसदी खेतों में ही सिंचाई की सुविधा है और 90 फीसदी फसल वर्षा के पानी पर निर्भर रहती है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में इस बार 32900 हेक्टेयर में गेहूं की फसल बोने की तैयारी चल रही है।
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इसमें से मात्र 3656 हेक्टेयर में ही सिंचाई की सुविधा है। इसी तरह जौ की फसल 3746 हेक्टेयर में बोई जाएगी। जौ की फसल के लिए मात्र 12 हेक्टेयर में सिंचाई का पानी मिल पाता है। मसूर की स्थिति और भी खराब है। इसे ज्यादा ऊंचाई वाले स्थानों पर बोया जाता है। इस बार मसूर को 4001 हेक्टेयर में बोने की तैयारी है, लेकिन सिंचाई की सुविधा सिर्फ 63 हेक्टेयर को ही मिल पाएगी।
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मौसम विभाग के अनुसार इस समय नमी का स्तर 60 से 74 प्रतिशत तक मिल रहा है। जल्दी बारिश न होने पर नमी का स्तर और कम हो जाएगा। नमी की कमी से फसलों पर सबसे पहले असर पड़ेगा। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. आरके सिंह का कहना है कि यदि सितंबर के अंत तक पर्याप्त बारिश हो जाती तो अब तक जमीन में बुआई के लिए अच्छी नमी मिल जाती। उन्होंने कहा कि कम नमी में बोया जाने वाला बीज अंकुरित नहीं हो पाएगा और उसके जमीन के अंदर ही खराब होने की आशंका रहेगी। उन्होंने कहा कि किसानों को कम नमी में बुआई नहीं करनी चाहिए। वह कहते हैं कि यदि अक्तूबर में बारिश नहीं हुई तो गेहूं, मसूर, जौ का उत्पादन कम से कम 20 प्रतिशत तक कम हो जाएगा। फसल के उगने और बढ़ने में ज्यादा देरी होगी। उसका असर उत्पादन पर पड़ेगा।
सब्जियों पर भी असर पड़ने की आशंका
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. मीनाक्षी जोशी का कहना है कि कम बारिश का असर सब्जियों के उत्पादन पर पड़ेगा। वह बताती हैं कि जिले में ज्यादातर सब्जी उत्पादक क्षेत्र में बारिश के पानी की जरूरत रहती है। उन्होंने काश्तकारों को सुझाव दिया कि वह उपलब्ध पानी का उपयोग करें और सब्जियों को पानी उपलब्ध कराएं। इस मौसम में प्याज, लहसुन, गोभी, धनिया, मेथी, राई जैसी सब्जियों की बुआई की जाती है।
अक्तूबर में बारिश की मात्रा शून्य रहने की संभावना
मौसम विभाग के पूर्वानुमान से ऐसा लगता है कि अक्तूबर का महीना बारिश की दृष्टि से शून्य रहेगा। वैसे पिथौरागढ़ जिले में अक्तूबर में औसत बारिश 65.3 मिलीमीटर होती है। इस बार अब तक अक्तूबर में बारिश की बूंद नहीं गिरी है। अलबत्ता नवंबर को औसत बारिश की दृष्टि से शून्य में रखा जाता है।