पीने के पानी में सीवरेज की निकासी
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सैन्य अस्पताल के सीवरेज की निकासी ठुलीगाड़ में हो रही है। रई गधेरे का दूषित हो चुका पानी भी ठुलीगाड़ में ही जा रहा है। गधेरे के इर्द-गिर्द बने सैकड़ों मकानों, व्यावसायिक संस्थानों की गंदगी सीधे गधेरे में समा रही है। पिछले दिनों एक सप्ताह तक शहर की 55 फीसदी आबादी को सीवर मिला पानी पिलाया जा चुका है। ठुलीगाड़ पेयजल योजना में सैन्य अस्पताल का सीवरेज मिलने के मामले ने जन दबाव के चलते तूल पकड़ लिया है। स्थानीय विधायक एवं पेयजल मंत्री प्रकाश पंत ने इस मामले की शिकायत एनजीटी से करने का निर्णय लिया है।
बता दें कि पिछले दिनों ही सैन्य अस्पताल के सीवरेज के ठुलीगाड़ पंपिंग योजना में निकासी का मामला उजागर हुआ था। इससे पहले सप्ताह भर तक दूषित पानी की पिथौरागढ़ के 55 फीसदी से अधिक घरों में आपूर्ति हुई। इस मामले में सैन्य अस्पताल के ठेकेदार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई। पेयजल मंत्री का कहना है कि इस तरह की गंभीर लापरवाही का मामला एनजीटी में ले जाया जाएगा।
रई गधेरा भी ठुलीगाड़ पंपिंग योजना को दूषित कर रहा है। पिथौरागढ़ के शीर्ष चंडाक के मड़ स्थित चंडिका मंदिर से रई गधेरे का उद्गम है और मड़ से पुनेड़ी, लिंठ्यूड़ा होते हुए रई पहुंचता है। रई से चटकेश्वर, पंडा फार्म होते हुए ठुलीगाड़ में मिल जाता है। रई क्षेत्र में आते-आते गधेरे में सैकड़ों मकानों, व्यावसायिक संस्थानों का सीवरेज मिल जाता है। इनमें ऑटो मोबाइल वर्कशॉप के अलावा होटल, रेस्तरां, बारात घर भी शामिल हैं। दर्जन भर से अधिक नाले-नालियों का निकास भी इसी गधेरे में होता है। सीवरेज के अलावा कई स्थानों पर जैविक-अजैविक कूड़ा गधेरे में डाला जा रहा है। रई गधेरे का यही गंदा पानी ठुलीगाड़ पंपिंग योजना के अपस्ट्रीम तक पहुंचता है। दरअसल पूरी पंपिंग योजना इसी गधेरे के पानी पर निर्भर है। गधेरे का यही गंदा पानी छनने और क्लोरीन मिलाने के बाद घरों में सप्लाई हो रहा है।
प्रभावितों की होगी जन सुनवाई
पिथौरागढ़। प्रदूषित पेयजल आपूर्ति के मामले में जन सुनवाई होगी। पेयजल मंत्री ने डीएम को प्रभावितों के सर्वे के साथ ही सुनवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने डीएम को व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने को कहा है। इसके साथ ही जल संस्थान के जीएम को पूरे प्रकरण की जांच कर 18 फरवरी तक रिपोर्ट देने को कहा है।
नगर पालिका और जल संस्थान को नहीं कोई परवाह
पिथौरागढ़। ठुलीगाड़ पंपिंग योजना को पानी देने वाले रई गधेरे की बदहाली की सीधा जिम्मेदार आबादी तो है ही वहीं, देखरेख और संरक्षण की जिम्मेदार नगर पालिका ने भी चुप्पी साधी है। गधेरे को गंदा करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। न ही गंदगी को गधेरे में जाने से रोकथाम के उपाय किए हैं। दूसरी ओर पेयजल के लिए गधेरे का पानी इस्तेमाल करने वाले जल संस्थान ने भी गधेरे में गंदगी को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाए हैं।
सैन्य अस्पताल के सीवरेज की निकासी ठुलीगाड़ पंपिंग योजना में होना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस मामले में एनजीटी से संबंधित पक्ष की शिकायत की जाएगी। पुलिस को इस सिलसिले में दर्ज मुकदमे में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए जा रहे हैं।
-प्रकाश पंत, पेयजल मंत्री, उत्तराखंड
जल स्रोत रई गधेरे के हालात चिंताजनक हैं। मकानों, व्यावसायिक संस्थानों के अलावा आईटीबीपी से गंदगी जाने की शिकायत मिली है। विभाग स्रोत में सीवरेज डालने वालों को चिन्हित कर वैधानिक कार्रवाई करेगा। -विशाल कुमार, ईई, जल संस्थान
नगर पालिका समय-समय पर स्रोत की सफाई कराती है। स्थानीय बाशिंदों को प्रदूषण फैलाने से रोकने के लिए लगातार ताकीद किया जाता रहा है। इसके बावजूद गंदगी डालने की शिकायतें मिल रही हैं। आरोपियों को चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी। -खीमानंद जोशी, ईओ, नगर पालिका