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खनन माफिया की धमकियों से भी नहीं डरे नवीन
दीपक उप्रेती/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Wed, 29 Mar 2017 10:43 PM IST
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हाइकोर्ट में खनन के खिलाफ याचिका दायर करने वाले नवीन पंत
- फोटो : अमर उजाला
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खनन माफिया से कई बार धमकी मिलने के बाद भी बागेश्वर जिले के कांडा तहसील के गणुवा गांव निवासी नवीन चंद्र पंत ने अपने गांव में अवैध खनन रोकने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। जनहित याचिका पर पूरे प्रदेश में खनन पर रोक संबंधी हाइकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से 36 याचिकाकर्ता वर्षीय नवीन खुश हैं। वह कहते हैं कि इतने सख्त फैसले की अपेक्षा नहीं थी।
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यहां बैंक रोड पर जिला अस्पताल के पास ओम साईंनाथ पैथालॉजी लैब का संचालन कर रहे नवीन चंद्र पंत ने बताया कि कोर्ट में जनहित याचिका दायर होने की सूचना मिलते ही कई खनन माफिया के धमकी भरे फोन उनके पास आए। आज भी उनको भय है कि जिन लोगों का धंधा बंद हो गया है वह उनके लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। नवीन ने कहा कि खनन का खौफ उनके गांव में इस कदर बढ़ गया था कि कई परिवार गांव छोड़कर अन्यत्र बस गए। अब गांव की जमीन खेती लायक नहीं है। उसमें जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। गांव में ऐसा माहौल हो गया कि जैसे यहां कोई आबादी नहीं रहती, सिर्फ खनन माफिया का ही राज चलता है।
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बताया कि उनके गांव गणुवा, सरमौली, भरकांडे, अधेलिया में वर्ष 2000 से पहले भी खड़िया खनन होता था, लेकिन वर्ष 2000 में यह खनन बंद हो गया। पूरे इलाके में मिलने वाली खड़िया पर खनन माफिया की नजर लगी थी। माफिया ने दोबारा प्रयास कर 2009 से खड़िया खनन का काम शुरू कर दिया। जब दोबारा खनन का काम शुरू हुआ तो अनियमितताओं और मनमानी की पराकाष्ठा होने लगी। लोगों के घरों से मात्र आठ मीटर की दूरी से खनन होने लगा। गांव के सभी नौले, धारे, खेत खनन की चपेट में आ गए। पूरे इलाके में भय का माहौल पैदा हो गया। रात में 11 बजे तक भी खनन के लिए ब्लास्टिंग होना और वाहनों की गड़गड़ाहट से लोगों का जीना दूभर हो गया। वह कहते हैं कि कई बार बागेश्वर के जिला प्रशासन को इस अंधेरगर्दी की जानकारी दी गई, लेकिन प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया। आखिरकार गांव के एक अन्य युवा मनोज पंत जो इस समय दिल्ली में हैं, के साथ मिलकर 2015 में उन्होंने हाइकोर्ट में खनन के खिलाफ जनहित याचिका दायर कर दी।
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नवीन बताते हैं कि हाइकोर्ट ने इस मामले में बागेश्वर के डीएम मंगेश घिल्डियाल को कोर्ट में हाजिर किया। दो-तीन बार वह खुद भी कोर्ट में गए। बाकी सब कार्रवाई उनके वकील प्रभाकर जोशी ने ही पूरी की। वह बताते हैं कि इस पूरे मामले में बागेश्वर के डीएम की रिपोर्ट काफी मजबूत आधार बन गई। वह डीएम मंगेश घिल्डियाल की इस बात के लिए तारीफ भी करते हैं कि उन्होंने सारे मामले में बिना किसी दबाव के निष्पक्ष और सही रिपोर्ट तैयार की।
नवीन ने बताया कि कोर्ट में जनहित याचिका दायर होने की सूचना मिलते ही कई खनन माफिया के धमकी भरे फोन उनके पास आए। आज भी उनको भय है कि जिन लोगों का धंधा बंद हो गया है वह उनके लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। नवीन ने कहा कि खनन का खौफ उनके गांव में इस कदर बढ़ गया था कि कई परिवार गांव छोड़कर अन्यत्र बस गए। अब गांव की जमीन खेती लायक नहीं है। गांव में ऐसा माहौल हो गया कि जैसे यहां कोई आबादी नहीं रहती, सिर्फ खनन माफिया का ही राज चलता है।
नवीन ने बनाई जग, जननी ग्राम विकास समिति
खनन माफिया के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले नवीन चंद्र पंत ने 2010 में जग, जननी ग्राम विकास समिति का गठन किया। इसमें अच्छी सोच रखने वाले युवा शामिल किए गए। खुद मेडिकल लैब टेक्नीशियन का डिप्लोमा प्राप्त नवीन ने 2006 से पैथालॉजी का काम शुरू किया। वह अपने काम से संतुष्ट हैं।