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Pithoragarh News: डीडीहाट में उत्पादित चाय की महक विदेशों तक
Wed, 05 Apr 2023 11:27 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Wed, 05 Apr 2023 11:27 PM IST
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डीडीहाट (पिथौरागढ़)। उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड और विकासखंड डीडीहाट के सहयोग से तीन साल पहले के दस गांवों में शुरू हुई चाय की खेती अब विदेशों में अपनी महक फैला रही है। चाय की खेती करने से किसानों की अच्छी आमदनी भी होने लगी है।
तीन साल पहले भैस्यूड़ी, तिलाड़ी, मढ़, लेपार्थी, ननपापो, भड़गांव, खीरी, घौकली, खोलीमाली और भनड़ा गांव में कई हेक्टेयर बंजर भूमि पर चाय की नर्सरी तैयार की गई थी। मनरेगा के तहत यहां के लोगों को 100 दिन का रोजगार विकासखंड के माध्यम से दिया गया। तीन सालों में डेढ़ करोड़ की राशि से इन गांवों में चाय के बागान तैयार किए जा चुके हैं।
अब इन बागानों की चाय की पत्ती को तोड़कर कौसानी की चाय फैक्टरी में भेजा जा रहा है जहां पर तीन ग्रेड की चाय का निर्माण कर भारत के विभिन्न राज्यों, अमेरिका, आस्ट्रेलिया सहित कई विदेशी शहरों में भेजी जा रही है। संवाद
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विकासखंड के माध्यम से तीन साल पहले शुरू हुई चाय की खेती ने दस गांवों के किसानों को स्वरोजगार से जोड़ने का काम किया है। तीन साल में इन चाय बागानों में डेढ़ करोड़ से अधिक की राशि का व्यय किया जा चुका है। 15 साल के बाद ग्रामीणों की भूमि के चाय बगीचे उनके स्वयं के होंगे जिनकी बिक्री वह स्वयं कर सकेंगे।
-बबीता चुफाल, ब्लाॅक प्रमुख डीडीहाट।
डीडीहाट की चाय को स्वाद युक्त के रूप में नई पहचान मिल रही है। कौसानी की चाय फैक्टरी में ग्रेड वन की चाय बनाकर विदेशों और भारत के विभिन्न हिस्सों में बेची जा रही है। 15 सालों तक इन चाय बागानों की देखरेख उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड के माध्यम से किया जाएगा। -केशर सिंह मनौला, सहायक प्रबंधक उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड।
तीन साल पहले भैस्यूड़ी, तिलाड़ी, मढ़, लेपार्थी, ननपापो, भड़गांव, खीरी, घौकली, खोलीमाली और भनड़ा गांव में कई हेक्टेयर बंजर भूमि पर चाय की नर्सरी तैयार की गई थी। मनरेगा के तहत यहां के लोगों को 100 दिन का रोजगार विकासखंड के माध्यम से दिया गया। तीन सालों में डेढ़ करोड़ की राशि से इन गांवों में चाय के बागान तैयार किए जा चुके हैं।
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अब इन बागानों की चाय की पत्ती को तोड़कर कौसानी की चाय फैक्टरी में भेजा जा रहा है जहां पर तीन ग्रेड की चाय का निर्माण कर भारत के विभिन्न राज्यों, अमेरिका, आस्ट्रेलिया सहित कई विदेशी शहरों में भेजी जा रही है। संवाद
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विकासखंड के माध्यम से तीन साल पहले शुरू हुई चाय की खेती ने दस गांवों के किसानों को स्वरोजगार से जोड़ने का काम किया है। तीन साल में इन चाय बागानों में डेढ़ करोड़ से अधिक की राशि का व्यय किया जा चुका है। 15 साल के बाद ग्रामीणों की भूमि के चाय बगीचे उनके स्वयं के होंगे जिनकी बिक्री वह स्वयं कर सकेंगे।
-बबीता चुफाल, ब्लाॅक प्रमुख डीडीहाट।
डीडीहाट की चाय को स्वाद युक्त के रूप में नई पहचान मिल रही है। कौसानी की चाय फैक्टरी में ग्रेड वन की चाय बनाकर विदेशों और भारत के विभिन्न हिस्सों में बेची जा रही है। 15 सालों तक इन चाय बागानों की देखरेख उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड के माध्यम से किया जाएगा। -केशर सिंह मनौला, सहायक प्रबंधक उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड।