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ढोल-नगाड़ों की थाप पर थिरके कैलाश यात्री
Mon, 17 Jun 2019 10:23 PM IST
kamlesh kamlesh
ब्यूरो/ अमर उजाला , डीडीहाट (पिथौरागढ़)।
ब्यूरो/ अमर उजाला , डीडीहाट (पिथौरागढ़)।
Published by: kamlesh kamlesh
Updated Mon, 17 Jun 2019 10:23 PM IST
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डीडीहाट आईटीबीपी मिर्थी में ढोल-नगाड़ों की धुन पर थिरकते कैलाश यात्री।
- फोटो : पिथौरागढ़
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कैलाश मानसरोवर यात्रा का दूसरा दल का पर्यटक आवास गृह पहुंचने पर फूल-मालाओं के साथ स्वागत किया गया। दोपहर के भोजन के बाद यात्री आईटीबीपी मिर्थी पहुंचे, जहां ढोल-नगाड़ों की थाप पर यात्री जमकर थिरके।
लाइजनिंग ऑफिसर शशि प्रकाश पांडेय और शिवम प्रकाश सिंह के नेतृत्व में 45 सदस्यीय दल पर्यटक आवास गृह पहुंचा। दल में 37 पुरुष और आठ महिला यात्री शामिल हैं। टीआरसी पहुंचने पर यात्रियों का प्रबंधक आनंद आर्या के नेतृत्व में स्वागत किया गया। यहां यात्रियों को तरोताजा करने के लिए बुरांश का जूस पिलाया गया। इसके बाद यात्रियों को भोजन कराया गया। दल में दिल्ली के 11, गुजरात के 10, हरियाणा और महाराष्ट्र के छह-छह, राजस्थान और यूपी के पांच-पांच, उत्तराखंड और पश्चिमी बंगाल के एक-एक यात्री शामिल हैं। भोजन के बाद यात्री सातवीं वाहिनी आईटीबीपी मिर्थी पहुंचे। यहां उप सेनानी मुकेश चंद्र मीणा के नेतृत्व में बल के जवानों ने यात्रियों का छलिया नृत्य और ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया। यात्री स्वागत से काफी अभिभूत नजर आए।
ढोल-नगाड़ों की थाप पर यात्री जमकर थिरके। उनका कहना था कि जब यहां के बाजे-गाजे बजते हैं तो ऐसा लगता है साक्षात शिव नृत्य कर रहे हैं। दल में सबसे कम उम्र के यात्री गुजरात के हीरन कुमार मोहन भाई (27) और सबसे अधिक उम्र 66 साल के हरियाणा के राम स्नेही कौशिक हैं। उत्तराखंड के देहरादून निवासी अरविंद धार (49) का कहना था उन्हें देवभूमि में रहते भोलेनाथ की नगरी के दर्शन का सौभाग्य मिला है।
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कहा कि उत्तराखंड से अधिक से अधिक यात्रियों को कैलाश दर्शन को जाना चाहिए। यात्रियों को उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्वास्थ्य संबंधी आने वाली दिक्कतों के बारे में जानकारी दी गई। स्वागत करने वालों में सहायक सेनानी दिलीप सिंह, हरवंश लाल, डॉ. दीपक गोगोई, ई. विक्रांत बिष्ट, हवलदार आन सिंह नेगी समेत जवान मौजूद रहे। बाद में यात्री आधार शिविर धारचूला पहुंच गए।
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लाइजनिंग ऑफिसर शशि प्रकाश पांडेय और शिवम प्रकाश सिंह के नेतृत्व में 45 सदस्यीय दल पर्यटक आवास गृह पहुंचा। दल में 37 पुरुष और आठ महिला यात्री शामिल हैं। टीआरसी पहुंचने पर यात्रियों का प्रबंधक आनंद आर्या के नेतृत्व में स्वागत किया गया। यहां यात्रियों को तरोताजा करने के लिए बुरांश का जूस पिलाया गया। इसके बाद यात्रियों को भोजन कराया गया। दल में दिल्ली के 11, गुजरात के 10, हरियाणा और महाराष्ट्र के छह-छह, राजस्थान और यूपी के पांच-पांच, उत्तराखंड और पश्चिमी बंगाल के एक-एक यात्री शामिल हैं। भोजन के बाद यात्री सातवीं वाहिनी आईटीबीपी मिर्थी पहुंचे। यहां उप सेनानी मुकेश चंद्र मीणा के नेतृत्व में बल के जवानों ने यात्रियों का छलिया नृत्य और ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया। यात्री स्वागत से काफी अभिभूत नजर आए।
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ढोल-नगाड़ों की थाप पर यात्री जमकर थिरके। उनका कहना था कि जब यहां के बाजे-गाजे बजते हैं तो ऐसा लगता है साक्षात शिव नृत्य कर रहे हैं। दल में सबसे कम उम्र के यात्री गुजरात के हीरन कुमार मोहन भाई (27) और सबसे अधिक उम्र 66 साल के हरियाणा के राम स्नेही कौशिक हैं। उत्तराखंड के देहरादून निवासी अरविंद धार (49) का कहना था उन्हें देवभूमि में रहते भोलेनाथ की नगरी के दर्शन का सौभाग्य मिला है।
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कहा कि उत्तराखंड से अधिक से अधिक यात्रियों को कैलाश दर्शन को जाना चाहिए। यात्रियों को उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्वास्थ्य संबंधी आने वाली दिक्कतों के बारे में जानकारी दी गई। स्वागत करने वालों में सहायक सेनानी दिलीप सिंह, हरवंश लाल, डॉ. दीपक गोगोई, ई. विक्रांत बिष्ट, हवलदार आन सिंह नेगी समेत जवान मौजूद रहे। बाद में यात्री आधार शिविर धारचूला पहुंच गए।