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भूस्खलन संभावित पहाड़ियों के उपचार तक राहत मिलने की उम्मीद नहीं
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पिथौरागढ़-घाट बारहमासी सड़क में इस तरह गिरता रहता है मलबा। संवाद
- फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। सीमांत जिले की जीवन रेखा कहलाने वाली पिथौरागढ़-घाट बारमासी सड़क में भूस्खलन संभावित पहाड़ियों का उपचार किए बिना पांच लाख की आबादी को बरसात में राहत नहीं मिल सकती है। दरकती पहाड़ियों का उपचार होने तक बरसात में यहां के लोगों को पहाड़ियों से गिरते बोल्डरों और मलबे पर पैदल चलना पड़ेगा।
बारहमासी सड़क बनने के बाद पिथौरागढ़ से टनकपुर पहुंचना आसान हो गया है। पहले जहां 150 किमी का यह सफर छह घंटे में तय होता था अब साढ़े तीन से चार घंटे में लोग गंतव्य तक पहुंच जाते हैं लेकिन बरसात में परेशानियां कम नहीं हुई हैं। बरसात शुरू होते ही सीमांत के लोगों की परेशानियां भी शुरू हो जाती हैं। इन परेशानियों का कारण बारहमासी सड़क में भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील घाट बैंड, दिल्ली बैंड और चुपकोट बैंड हैं। जून से सितंबर इन स्थानों पर जबरदस्त भूस्खलन होता है। यातायात ठप होने पर पिथौरागढ़ जिले के लिए जरूरी सामान की आपूर्ति तक बंद हो जाती है। बारहमासी सड़क कटिंग के बाद पहाड़ियों से भूस्खलन बढ़ा है। वर्ष 2018 से लेकर 2021 तक हर साल बरसात में भूस्खलन के कारण सड़क के बंद होने से सबसे अधिक परेशानियां झेलनी पड़ी हैं। वर्ष 2021 में घाट बैंड से लेकर गुरना तक यह बारहमासी सड़क 20 से अधिक बार बंद हुई थी।
सब्जी और गैस के भी पड़ जाते हैं लाले
पिथौरागढ़। बरसात में बारहमासी सड़क में घाट-पिथौरागढ़ तक तीन-चार स्थल नासूर बन जाते हैं। यह ऐसे स्थल हैं जहां पर हल्की बारिश में भी मलबा आ जाता है। हजारों टन मलबा आने के कारण भारी भरकम मशीनें लगाने के बावजूद एक दिन में सड़क खोल पाना संभव नहीं हो पाता है।
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शवदाह करना तक हो जाता है मुश्किल
पिथौरागढ़। बारहमासी सड़क के बंद होने से पिथौरागढ़ शहर सहित पांच सौ से अधिक गांवों के लोगों के लिए शवदाह करना तक मुश्किल हो जाता है। पिथौरागढ़ से शव दाह के लिए लोग घाट रामेश्वर जाते हैं। बरसात में सड़क बंद होने से चुपकोट बैंड से कई बार लोगों को शव कंधे में रखकर 10 से 15 किलोमीटर की पैदल दूरी नापनी पड़ती है।
एनएच का विकल्प नहीं तलाशा जा सका
पिथौरागढ़। बरसात में दशकों से परेशानियां झेलने के बावजूद पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय के लिए बिना किसी बाधा के यातायात सुुचारु रखने के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग तक नहीं बनाया जा सका जबकि जाख-रामेश्वर सड़क को बारहमासी सड़क के बंद होने की स्थिति में विकल्प के रूप में देखा जा रहा था। करीब 13.9 किमी लंबी इस सड़क की कटिंग घाट के मीना बाजार के पास तक हो चुकी है।
टीएचडीसी के सर्वे से जगी उपचार की उम्मीद
पिथौरागढ़। बारहमासी सड़क के भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में टिहरी हाइड्रो डेवलेपमेंट कॉर्पोरेशन (टीएचडीसी) के सर्वे से शीघ्र ट्रीटमेंट की उम्मीद जगी है। डीपीआर को सड़क परिवहन मंत्रालय भारत सरकार से स्वीकृति के मिलने के बाद भूस्खलन संभावित क्षेत्रों का उपचार शुरू हो जाएगा। करीब 150 किमी लंबी पिथौरागढ़-टनकपुर बारहमासी सड़क में टीएचडीसी ने चंपावत जिले के सिंगदा में दो स्थानों पर और पिथौरागढ़ जिले में घाट बैंड, दिल्ली बैंड, चुपकोट बैंड, पीएनएफ स्कूल एंचोली, हनुमान मंदिर, धमौड़ सहित कुछ अन्य भूस्खलन संभावित क्षेत्रों का सर्वे किया है।
विधायक की पीड़ा
बारहमासी सड़क की कटिंग मानकों के अनुसार नहीं की गई। कई स्थानों पर सड़क कटिंग का मलबा डंपिंग जोन के बजाय नदी में डाला गया है। इस सड़क में हुई गड़बड़ियों की जांच की मांग की गई है। विधानसभा में भी सवाल उठाया जाएगा। यह पिथौरागढ़ जिले की सबसे महत्वपूर्ण सड़क है, जो स्थान भूस्खलन की दृष्टि से खतरा बने हैं उनका वैज्ञानिक तरीके से मानकों के अनुसार उपचार किया जाना चाहिए। - मयूख महर, विधायक पिथौरागढ़।
विभाग का पक्ष
बारहमासी सड़क में कुछ स्थान बेहद संवेदनशील हैं। ऐसे भूस्खलन संभावित क्षेत्रों का उपचार किया जाना है। डीपीआर तैयार कर स्वीकृति के लिए सड़क परिवहन मंत्रालय भारत सरकार को भेजी जाएगी। स्वीकृति मिलने पर भूस्खलन संभावित स्थलों के उपचार का कार्य शुरू किया जाएगा।
- बीएल चौधरी, एई, एनएच उपखंड, पिथौरागढ़।
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बारहमासी सड़क बनने के बाद पिथौरागढ़ से टनकपुर पहुंचना आसान हो गया है। पहले जहां 150 किमी का यह सफर छह घंटे में तय होता था अब साढ़े तीन से चार घंटे में लोग गंतव्य तक पहुंच जाते हैं लेकिन बरसात में परेशानियां कम नहीं हुई हैं। बरसात शुरू होते ही सीमांत के लोगों की परेशानियां भी शुरू हो जाती हैं। इन परेशानियों का कारण बारहमासी सड़क में भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील घाट बैंड, दिल्ली बैंड और चुपकोट बैंड हैं। जून से सितंबर इन स्थानों पर जबरदस्त भूस्खलन होता है। यातायात ठप होने पर पिथौरागढ़ जिले के लिए जरूरी सामान की आपूर्ति तक बंद हो जाती है। बारहमासी सड़क कटिंग के बाद पहाड़ियों से भूस्खलन बढ़ा है। वर्ष 2018 से लेकर 2021 तक हर साल बरसात में भूस्खलन के कारण सड़क के बंद होने से सबसे अधिक परेशानियां झेलनी पड़ी हैं। वर्ष 2021 में घाट बैंड से लेकर गुरना तक यह बारहमासी सड़क 20 से अधिक बार बंद हुई थी।
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सब्जी और गैस के भी पड़ जाते हैं लाले
पिथौरागढ़। बरसात में बारहमासी सड़क में घाट-पिथौरागढ़ तक तीन-चार स्थल नासूर बन जाते हैं। यह ऐसे स्थल हैं जहां पर हल्की बारिश में भी मलबा आ जाता है। हजारों टन मलबा आने के कारण भारी भरकम मशीनें लगाने के बावजूद एक दिन में सड़क खोल पाना संभव नहीं हो पाता है।
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शवदाह करना तक हो जाता है मुश्किल
पिथौरागढ़। बारहमासी सड़क के बंद होने से पिथौरागढ़ शहर सहित पांच सौ से अधिक गांवों के लोगों के लिए शवदाह करना तक मुश्किल हो जाता है। पिथौरागढ़ से शव दाह के लिए लोग घाट रामेश्वर जाते हैं। बरसात में सड़क बंद होने से चुपकोट बैंड से कई बार लोगों को शव कंधे में रखकर 10 से 15 किलोमीटर की पैदल दूरी नापनी पड़ती है।
एनएच का विकल्प नहीं तलाशा जा सका
पिथौरागढ़। बरसात में दशकों से परेशानियां झेलने के बावजूद पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय के लिए बिना किसी बाधा के यातायात सुुचारु रखने के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग तक नहीं बनाया जा सका जबकि जाख-रामेश्वर सड़क को बारहमासी सड़क के बंद होने की स्थिति में विकल्प के रूप में देखा जा रहा था। करीब 13.9 किमी लंबी इस सड़क की कटिंग घाट के मीना बाजार के पास तक हो चुकी है।
टीएचडीसी के सर्वे से जगी उपचार की उम्मीद
पिथौरागढ़। बारहमासी सड़क के भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में टिहरी हाइड्रो डेवलेपमेंट कॉर्पोरेशन (टीएचडीसी) के सर्वे से शीघ्र ट्रीटमेंट की उम्मीद जगी है। डीपीआर को सड़क परिवहन मंत्रालय भारत सरकार से स्वीकृति के मिलने के बाद भूस्खलन संभावित क्षेत्रों का उपचार शुरू हो जाएगा। करीब 150 किमी लंबी पिथौरागढ़-टनकपुर बारहमासी सड़क में टीएचडीसी ने चंपावत जिले के सिंगदा में दो स्थानों पर और पिथौरागढ़ जिले में घाट बैंड, दिल्ली बैंड, चुपकोट बैंड, पीएनएफ स्कूल एंचोली, हनुमान मंदिर, धमौड़ सहित कुछ अन्य भूस्खलन संभावित क्षेत्रों का सर्वे किया है।
विधायक की पीड़ा
बारहमासी सड़क की कटिंग मानकों के अनुसार नहीं की गई। कई स्थानों पर सड़क कटिंग का मलबा डंपिंग जोन के बजाय नदी में डाला गया है। इस सड़क में हुई गड़बड़ियों की जांच की मांग की गई है। विधानसभा में भी सवाल उठाया जाएगा। यह पिथौरागढ़ जिले की सबसे महत्वपूर्ण सड़क है, जो स्थान भूस्खलन की दृष्टि से खतरा बने हैं उनका वैज्ञानिक तरीके से मानकों के अनुसार उपचार किया जाना चाहिए। - मयूख महर, विधायक पिथौरागढ़।
विभाग का पक्ष
बारहमासी सड़क में कुछ स्थान बेहद संवेदनशील हैं। ऐसे भूस्खलन संभावित क्षेत्रों का उपचार किया जाना है। डीपीआर तैयार कर स्वीकृति के लिए सड़क परिवहन मंत्रालय भारत सरकार को भेजी जाएगी। स्वीकृति मिलने पर भूस्खलन संभावित स्थलों के उपचार का कार्य शुरू किया जाएगा।
- बीएल चौधरी, एई, एनएच उपखंड, पिथौरागढ़।