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राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन: पांच प्रमुख जियो-साइट्स पर लगे सूचना पट, पर्यटकों को मिलेगी प्रमाणिक जानकारी

Thu, 08 Oct 2026 06:26 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़
अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़ Published by: Heera Updated Thu, 08 Oct 2026 06:26 PM IST
सार

राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन के तहत दिल्ली विश्वविद्यालय की टीम ने बेड़ीनाग-गंगोलीहाट में पांच प्रमुख जियो-साइट्स पर सूचना पट लगाए, जिससे पर्यटकों और शोधार्थियों को प्रमाणिक जानकारी मिलेगी।

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Delhi University team installed information boards at 5 geo-sites in Bedinag-Gangolihat
बेड़ीनाग में जियो-साइट के लिए लगा सूचना पट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन के तहत दिल्ली विश्वविद्यालय के राम लाल आनंद कॉलेज की शोध टीम ने बेड़ीनाग और गंगोलीहाट क्षेत्र में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया। टीम ने क्षेत्र की पांच प्रमुख जियो-साइट्स पाताल भुवनेश्वर गुफा, गंगोलीहाट नगर, सेलीपाख गांव, कालीताल और चूरा गांव की वैज्ञानिक व्याख्या वाले सूचना पट स्थापित किए।

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इनके जरिये स्थानीय निवासियों, पर्यटकों और शोधार्थियों को इन स्थलों के भूवैज्ञानिक महत्व, प्राकृतिक इतिहास और इनके संरक्षण की जरूरतों के बारे में प्रामाणिक जानकारी मिल सकेगी।

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केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन इस मिशन से सीमांत जनपद में यह वैज्ञानिक पहल शुरू की गई है। विद्यालयों और राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बेड़ीनाग में परियोजना निदेशक डॉ. रविश लाल के नेतृत्व में कार्यशालाएं आयोजित की गईं।

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इनमें भूविज्ञानी प्रो. प्रभास पांडे, पुरातत्वविद् डॉ. पार्थ आर. चौहान ने अनुकूल जियो-टूरिज्म के विभिन्न पहलुओं से रूबरू कराया। कार्यशाला में लगाई गई शैलों, दुर्लभ खनिजों, जीवाश्म और प्रागैतिहासिक पाषाण उपकरणों की प्रदर्शनी विद्यार्थियों के बीच मुख्य आकर्षण का केंद्र रहीं। छात्रों ने इन धरोहरों को करीब से समझा और भूविज्ञान व पुरातत्व के क्षेत्र में उच्च शिक्षा और रोजगार की संभावनाएं भी जानीं। शोधार्थी आदित्य कुमार और प्रणील त्रिपाठी ने तकनीकी सत्र संचालन में योगदान दिया।

स्थानीय आजीविका और पर्यटन को मिलेगी नई दिशा
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी क्षेत्र को जियो-पार्क का दर्जा दिलाने के लिए वैज्ञानिक प्रलेखन के साथ स्थानीय समुदाय की भागीदारी अहम होती है। बताया कि पिथौरागढ़ और इसके आसपास की अनूठी भू-संरचनाएं भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर के हिमालयी जियो-पार्क का आधार बन सकती हैं। इससे संवेदनशील हिमालयी भू-भाग का वैज्ञानिक संरक्षण सुनिश्चित होगा तथा सतत पर्यटन के जरिये स्थानीय अर्थव्यवस्था और आजीविका को भी नया संबल मिलेगा।

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