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कंदराओं में जीवन बिताने वाले वनरावतों की बेटियों के हौसले बुलंद

Mon, 21 Sep 2015 10:51 PM IST
केबी पाल/अमर उजाला, अस्कोट (पिथौरागढ़)
केबी पाल/अमर उजाला, अस्कोट (पिथौरागढ़) Updated Mon, 21 Sep 2015 10:51 PM IST
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मानव जाति से दूर रहने वाले आदम जनजाति वनरावत समुदाय के लिए सुखद पहलू ही कहा जाएगा कि सदियों तक जंगलों की कंदराओं में जीवन व्यतीत करने वाले इस समुदाय की लड़कियाें में शिक्षा हासिल करने का जज्बा है। जमतड़ी ग्राम पंचायत के कंतोली की मंजू के बाद रेवती ने इस मुहिम को आगे बढ़ाया है। रेवती विवाह के बाद भी पढ़ाई जारी रखे है, इसमें उनके पति का भी महत्वपूर्ण योगदान है।
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चार साल पहले किमखोला (जौलजीबी) की रेवती (19) का कंतोली के खगेंद्र सिंह से विवाह हुआ। उस समय रेवती कक्षा छह में पढ़ती थी। इसे शिक्षा के प्रति ललक ही कहेंगे कि ससुराल आकर उसने अपने पति खगेंद्र से पढ़ाई आगे जारी रखने की बात कही। खगेंद्र ने न केवल हामी भरी, बल्कि राजकीय हाईस्कूल जमतड़ी में उसका दाखिला भी कराया।
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आज रेवती कक्षा 9 में पढ़ती है। 4 महीने पहले मां बनी रेवती पढ़ाई जारी रखना चाहती है। पति खगेंद्र कहते हैं कि वह रेवती को पूरी शिक्षा दिलाएंगे।

कन्याओं का हो रहा संरक्षण

अभाव में जी रहे आदम जनजाति समुदाय कन्याओं के संरक्षण में आगे है। खेतीबाड़ी, लकड़ी के औजार बनाकर, मजदूरी कर गरीबी में जीवन यापन कर रहे वनरावतों के स्कूल पढ़ने वाले बच्चों में भी लड़कियां लड़कों को बराबर की टक्कर नहीं, उनसे आगे हैं। प्राथमिक पाठशाला जमतड़ी में  कक्षा एक में 2 वनरावत बच्चे पढ़ते हैं, इनमें से 1 लड़की है। कक्षा दो में दोनों लड़कियां हैं। कक्षा 3 में 5 में से 3 लड़कियां, कक्षा 4 में 7 में से 3 लड़कियां, कक्षा 5 में 5 में से 2 लड़कियां हैं। हाईस्कूल जमतड़ी में कक्षा 6 में 5 वनरावत बच्चे पढ़ते हैं, जिसमें से 3 लड़कियां, कक्षा 7 में 5 में से 2 लड़कियां, कक्षा 8 में 6 में से 2 लड़कियां, कक्षा 9 में 4 में से 3 लड़कियां, कक्षा 10 में 4 में से 2 लड़कियां हैं। कुल 45 में से 22 लड़के-23 लड़कियां स्कूल जाती हैं।
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कम उम्र में विवाह चिंता का विषय
वनरावतों के अब भी कम उम्र में विवाह हो रहे हैं, जो चिंता का विषय है। सामाजिक संगठन और सरकार इस दिशा में वनरावतों को फोकस कर कोई पहल करते नहीं दिखाई दे रहे हैं। रेवती के ही मामले में देख लीजिए, उसकी शादी मात्र 15 वर्ष की उम्र में हो गई। अच्छी बात यह है कि रेवती ने 19 साल की उम्र में बच्चे को जन्म दिया। ऐसी कोई बात नहीं कि आदम जनजाति के लोग सही उम्र में विवाह करने के लिए राजी न हों। मंजू के मामले में यह सामने भी आया है। गांव के बच्चों के लिए प्रेरणा बनीं मंजू बलुवाकोट डिग्री कालेज की स्नातक अंतिम वर्ष की छात्रा है। जमतड़ी के प्रधान गोविंद सिंह भंडारी कहते हैं कि बाल विवाह के बारे में वनरावतों को जागरूक करने का काम किया जा रहा है।
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