{"_id":"67e0405296bb5000b90ce03b","slug":"dan-lost-his-life-due-to-lack-of-road-pithoragarh-news-c-230-1-shld1024-125545-2025-03-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pithoragarh News: सड़क के अभाव में दान की चली गई जान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pithoragarh News: सड़क के अभाव में दान की चली गई जान
Sun, 23 Mar 2025 10:39 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sun, 23 Mar 2025 10:39 PM IST
विज्ञापन
बंगापानी (पिथौरागढ़)। सड़क और स्वास्थ्य सुविधा के अभाव में एक और जान चली गई। दारमा गांव में पेट दर्द से पीड़ित ग्रामीण ने अस्पताल ले जाते समय डोली में ही दम तोड़ दिया।
बंगापानी तहसील का दारमा गांव अभी सड़क से नहीं जुड़ा है। यहां के ग्रामीणों को सात से नौ किमी पैदल चलकर गांव पहुंचना पड़ता है। शनिवार देर शाम गांव के दान सिंह धामी 58 वर्षीय के पेट में दर्द उठा। गांव में स्वास्थ्य और सड़क की सुविधा नहीं होने से ग्रामीणों ने डोली की व्यवस्था की। इसके बाद डोली उठाने के लिए ग्रामीण एकत्र हुए। जब ग्रामीण दान सिंह को डोली में बिठाकर बंगापानी के लिए निकले तो एक किमी दूर प्राथमिक विद्यालय के पास उसने दम तोड़ दिया।
इसके बाद ग्रामीण उसी डोली से दान सिंह का शव लेकर गांव लौटे। ग्रामीणों का कहना है कि नौ स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और एक वीर चक्र विजेता के गांव में न अस्पताल है और न ही सड़क की सुविधा है। यदि सड़क होती तो दान सिंह को समय से अस्पताल पहुंचा दिया जाता और जान बच जाती। सड़क के अभाव में हर साल लोगों की जान चली जाती है। लोगों की लगातार मांग के बावजूद गोरी नदी पर पुल नहीं बनाया गया है। क्षेत्रवासियों ने इसके लिए शासन प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बंगापानी तहसील का दारमा गांव अभी सड़क से नहीं जुड़ा है। यहां के ग्रामीणों को सात से नौ किमी पैदल चलकर गांव पहुंचना पड़ता है। शनिवार देर शाम गांव के दान सिंह धामी 58 वर्षीय के पेट में दर्द उठा। गांव में स्वास्थ्य और सड़क की सुविधा नहीं होने से ग्रामीणों ने डोली की व्यवस्था की। इसके बाद डोली उठाने के लिए ग्रामीण एकत्र हुए। जब ग्रामीण दान सिंह को डोली में बिठाकर बंगापानी के लिए निकले तो एक किमी दूर प्राथमिक विद्यालय के पास उसने दम तोड़ दिया।
विज्ञापन
इसके बाद ग्रामीण उसी डोली से दान सिंह का शव लेकर गांव लौटे। ग्रामीणों का कहना है कि नौ स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और एक वीर चक्र विजेता के गांव में न अस्पताल है और न ही सड़क की सुविधा है। यदि सड़क होती तो दान सिंह को समय से अस्पताल पहुंचा दिया जाता और जान बच जाती। सड़क के अभाव में हर साल लोगों की जान चली जाती है। लोगों की लगातार मांग के बावजूद गोरी नदी पर पुल नहीं बनाया गया है। क्षेत्रवासियों ने इसके लिए शासन प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है।
विज्ञापन