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दारमा - व्यास घाटी को बनाएंगे पर्वतारोहण के लिए प्रशिक्षण हब
Fri, 17 May 2019 10:54 PM IST
kamlesh kamlesh
ब्यूरो/ अमर उजाला , पिथौरागढ़।
ब्यूरो/ अमर उजाला , पिथौरागढ़।
Published by: kamlesh kamlesh
Updated Fri, 17 May 2019 10:54 PM IST
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एवरेस्ट फतह के बाद विजयी मुद्रा में सोर की बेटी शीतल।
- फोटो : पिथौरागढ़
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बृहस्पतिवार को दुनियां की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट (8848 मीटर) फतह करने वाली सोरघाटी की बेटी शीतल शुक्रवार को एवरेस्ट के बेस कैंप वापस लौट आईं हैं। योगेश गर्ब्याल ने कहा कि शीतल के साथ मिलकर भविष्य में पर्वतारोहण के लिए प्रशिक्षण हब बनाने की योजना है।
एवरेस्ट फतह के बाद शीतल बृहस्पतिवार को कैंप-2 लौट आईं थीं। शुक्रवार को वह नेपाल निवासी नमग्या शेरपा, छिरिंग शेरपा और कनाडा निवासी माइकल डी के साथ एवरेस्ट के बेस कैंप पहुंच गई हैं। शीतल के कोच योगेश गर्ब्याल ने बताया कि अभी एवरेस्ट पर और दलों को जाना है। तब तक शीतल बैस कैंप में रहेंगी। सभी लोग एक साथ वापस लौटते हैं। इस महीने के अंत में सभी लोग एक साथ काठमांडू वापस लौट आएंगे। गर्ब्याल ने बताया कि उनकी शीतल के साथ मिलकर व्यास और दारमा घाटी को माउंटेनियरिंग ट्रेनिंग का हब बनाने की योजना है। इसकी योजना बना ली गई है। उन्होंने पंचाचूली पर्वत श्रखंला को माउंटेनियरिंग प्रशिक्षण के लिए बेहतरीन स्थल बताया। गर्ब्याल के अनुसार दारमा के सीनला पास होते हुए व्यास घाटी एक आदर्श ट्रेक हो सकता है। पंचाचूली के चारों तरफ ग्लेशियर है। इसमें कुछ जोन प्रशिक्षण के लिहाज से लाजवाब हैं।
शीतल ने नवंबर, दिसंबर में दारमा, व्यास में लिया था प्रशिक्षण
शीतल के प्रशिक्षक एवरेस्टर योगेश गर्ब्याल ने बताया कि एवरेस्ट की तैयारी के लिए शीतल नवंबर, दिसंबर 2018 में दारमा-व्यास घाटी आईं थीं। गर्ब्यांग गांव में एक महीने तक रुकी थीं। आसपास की चोटियों में 20 किलो वजन के साथ 3000 से 4000 मीटर तक ट्रेकिंग करते थे।
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एवरेस्ट फतह के बाद शीतल बृहस्पतिवार को कैंप-2 लौट आईं थीं। शुक्रवार को वह नेपाल निवासी नमग्या शेरपा, छिरिंग शेरपा और कनाडा निवासी माइकल डी के साथ एवरेस्ट के बेस कैंप पहुंच गई हैं। शीतल के कोच योगेश गर्ब्याल ने बताया कि अभी एवरेस्ट पर और दलों को जाना है। तब तक शीतल बैस कैंप में रहेंगी। सभी लोग एक साथ वापस लौटते हैं। इस महीने के अंत में सभी लोग एक साथ काठमांडू वापस लौट आएंगे। गर्ब्याल ने बताया कि उनकी शीतल के साथ मिलकर व्यास और दारमा घाटी को माउंटेनियरिंग ट्रेनिंग का हब बनाने की योजना है। इसकी योजना बना ली गई है। उन्होंने पंचाचूली पर्वत श्रखंला को माउंटेनियरिंग प्रशिक्षण के लिए बेहतरीन स्थल बताया। गर्ब्याल के अनुसार दारमा के सीनला पास होते हुए व्यास घाटी एक आदर्श ट्रेक हो सकता है। पंचाचूली के चारों तरफ ग्लेशियर है। इसमें कुछ जोन प्रशिक्षण के लिहाज से लाजवाब हैं।
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शीतल ने नवंबर, दिसंबर में दारमा, व्यास में लिया था प्रशिक्षण
शीतल के प्रशिक्षक एवरेस्टर योगेश गर्ब्याल ने बताया कि एवरेस्ट की तैयारी के लिए शीतल नवंबर, दिसंबर 2018 में दारमा-व्यास घाटी आईं थीं। गर्ब्यांग गांव में एक महीने तक रुकी थीं। आसपास की चोटियों में 20 किलो वजन के साथ 3000 से 4000 मीटर तक ट्रेकिंग करते थे।
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