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दारमा घाटी में भालुओं ने मकानों को पहुंचाया नुकसान

Sat, 13 Apr 2019 11:00 PM IST
kamlesh kamlesh ब्यूरो/ अमर उजाला , धारचूला (पिथौरागढ़)।
ब्यूरो/ अमर उजाला , धारचूला (पिथौरागढ़)। Published by: kamlesh kamlesh Updated Sat, 13 Apr 2019 11:00 PM IST
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daarama ghaatee mein bhaaluon ne makaanon ko pahunchaaya nukasaan
धारचूला स्थित दारमा घाटी के सेला गांव में भालुओं द्वारा क्षतिग्रस्त मकान। - फोटो : पिथौरागढ़
दारमा घाटी में पंग्बाबे, सेला और नांगलिग के बीच कई जगहों पर बर्फबारी के चलते से पिछले तीन माह से सड़क बंद होने से लोगों की आवाजाही नहीं हो पा रही थी। अब सड़क खुलने के बाद ग्रामीण गांव पहुंचे तो मकानों और उनमें रखे सामान को नुकसान पहुंचाए जाने से उनके होश उड़ गए।
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सीपीडब्लूडी की ओर से बृहस्पतिवार को सेला तक सड़क खोल दी गई है। सड़क खुलने से सेला निवासी दारमा सेवा संगठन के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह सेलाल गांव गए। गांव से उन्होंने बताया कि भालुओं ने उनके और पानू सेलाल  में छत के रास्ते घरों के भीतर घुस कर खाने-पीने की चीजों को काफी नुकसान पहुंचाया है।
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उन्होंने बताया पिछले 5-6 सालों से दारमा के गांवों में भालुओं ने काफी नुकसान पहुंचाया है। चल गांव में बर्फबारी से जगत सिंह चलाल के मकान को भी काफी नुकसान पहुंचा है। उनका कहना था कि सड़क पूरी तरह खुलने के बाद ही अन्य गांवों में हुए नुकसान की जानकारी मिल पाएगी। दिलिंग दारमा सेवा समिति के महासचिव पूरन ग्वाल ने बताया कि घाटी के गांवों में मई के प्रथम सप्ताह से प्रवास शुरू हो जाएगा। उन्होंने प्रशासन और सीपीडब्ल्यूडी से शीघ्र सड़क खोलने की मांग उठाई है। सीपीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है फिलहाल सेला तक सड़क खोल दी गई है। अप्रैल के अंतिम सप्ताह तक सड़क पूरी तरह से खोल दी जाएगी।
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डीडीहाट, अस्कोट में वन्य जीवों आतंक से लोग परेशान
पिथौरागढ़। डीडीहाट, अस्कोट, मुवानी क्षेत्र के दर्जनों गांवों में सुअर और बंदरों के आतंक के चलते ग्रामीणों ने खेती करना छोड़ दिया है। कभी फसलों से लहलहाने वाले खेत वर्तमान में बंजर पड़े हैं। हाट, धौलेत, सिटौली, नारायणनगर, तल्ला-मल्ला मिर्थी, जेठीगांव समेत गर्खा और अस्कोट क्षेत्र के कई गांवों में खेती पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर काफी आक्रोश है कि बार-बार खेती बचाने की गुहार लगाई जाती है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। ब्यूरो
 
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