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जिले में बच्चों की संख्या के हिसाब से बेड़ों की संख्या नाकाफी

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 10 Aug 2021 11:15 PM IST
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Covid Hospital in Kumaun
थल का गोचर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र। - फोटो : PITHORAGARH
पिथौरागढ़। सीमांत जिले में कोरोना की दूसरी लहर के साथ जंग लड़ने के साथ ही तीसरी लहर से निपटने की तैयारियां जोरों पर हैं। जिले में 17 साल तक तक के एक लाख से अधिक बच्चे हैं। इस हिसाब से 550 बच्चों का जिम्मा एक बेड पर होगा।
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वहीं बाल रोग विशेषज्ञों की संख्या भी इस हिसाब से मात्र तीन है। अगर संक्रमित बच्चों की संख्या अधिक होती है और इन्हें अस्पतालों में भर्ती करवाना पड़े तो तैयारियां धड़ाम हो जाएंगी।
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स्वास्थ्य विभाग ने नर्सिंग कॉलेज में बच्चों के लिए कोविड केयर सेंटर (थ्रीसी) बनाया है। संक्रमित बच्चों के लिए 50 और उनके परिजनों के लिए भी 50 बेड लगाए गए हैं।
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बेस अस्पताल में गंभीर संक्रमित बच्चों के लिए पांच-पांच नियोनेटल और पीडियाट्रिक आईसीयू स्थापित किए गए हैं। यहां पर बच्चों के लिए 50 बेडों का थ्रीसी भी तैयार है। महिला अस्पताल में 12 बेड का नियोनेटल केयर यूनिट (एनसीयू) तैयार है।
जिला अस्पताल में पहले से स्थापित 20 आईसीयू बेड में से पांच बेड संक्रमित बच्चों के लिए आरक्षित हैं। सीएमओ डॉ. एचसी पंत ने बताया कि तैयारियां पूरी हैं। जिले में अन्य पीएचसी, सीएचसी में भी बच्चों के लिए बेड लगाए गए हैं।
जिस गति से संक्रमण की रफ्तार बढ़ेगी, उसी गति से बेड़ों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। उन्होंने बताया कि 17 आयु वर्ग तक तक के नाबालिगों के उपचार की कोई अलग से व्यवस्था नहीं है। संक्रमण की स्थिति पर ही कुछ कहा जा सकेगा।
कोरोना की तीसरी लहर में बड़ों से ही बच्चों में कोरोना पहुंच सकता है। इसलिए बड़ों को बाहर जाते समय मास्क पहनना, हाथों को बार-बार धोना चाहिए। बच्चों को ठंडी चीजें, दूषित पानी और बाहर बना भोजन देने से बचना होगा।
- डॉ. एसएस नबियाल, बालरोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल, पिथौरागढ़।
कोरोना की तीसरी लहर से बचने के लिए मास्क बेहद जरूरी होगा। अभिभावकों को बच्चों को बाहर का खाना नहीं खाना देना चाहिए। जितना हो सके घर में बना खाना ही बच्चों को खाने को दिया जाना चाहिए। सफाई का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है।
- डॉ. सिद्धि प्रसाद पंत, आयुर्वेदिक डॉक्टर, पिथौरागढ़।
कोरोना की तीसरी लहर में बच्चे अगर उष्ट, भुजंग, ताड़, कपालभाति, मत्स्य, अनुलोम-विलोम आसन करने से स्वास्थ्य ठीक रहेगा। कोरोना संक्रमण में भी इन योग आसनों को किया जा सकता है। बच्चों में कलर थेरेपी का इस्तेमाल कर कोरोना से बचाव किया जा सकता है।
- मुकुल चंद्र, योग व मर्म विशेषज्ञ, पिथौरागढ़।
सिर्फ टनकपुर में है एनआईसीयू
चंपावत। कोरोना की संभावित तीसरी लहर का सबसे ज्यादा खतरा बच्चों को है। इस चेतावनी के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी तेज करने का दावा किया है, लेकिन जमीनी स्तर पर उपलब्ध संसाधन दावों से मेल नहीं खाते हैं।
जिले में बाल रोग विशेषज्ञ तो पर्याप्त हैं, लेकिन अन्य सुविधाएं जरूरत के सापेक्ष खासी कम है। 1.19 लाख बच्चों के लिए सिर्फ 36 ऑक्सीजन युक्त बेड हैं। यानी 3305 बच्चों पर एक बेड है। वेंटिलेटर भी मात्र छह हैं।
जिले में 17 वर्ष तक के 1.19 लाख नाबालिगों के इलाज के लिए चंपावत, टनकपुर और लोहाघाट के तीन अस्पतालों में बाल रोग विशेषज्ञ हैं। जिला अस्पताल में नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) नहीं है। ये यूनिट एकमात्र टनकपुर में है।
हालांकि कोरोना के वार से बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए जिला अस्पताल में बच्चों के लिए 11 बेड का विशेष कक्ष बनाया गया है। पीएमएस डॉ. आरके जोशी का कहना है कि ये सभी बेड ऑक्सीजन सुविधा वाले हैं।
यहां चार वेंटिलेटर और ऑक्सीजन प्लांट के साथ ही 108 ऑक्सीजन सिलिंडर भी हैं। जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में 215 बेड हैं, लेकिन इनमें से 36 बेड ही बच्चों के लिए आरक्षित किए गए हैं।
सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी का कहना है कि तीन प्रमुख सरकारी अस्पतालों के अलावा चंपावत के एक निजी अस्पताल में बच्चों के इलाज की भरपूर सुविधाएं हैं।
इस बच्चों को बचाने के लिए जिले की 10 आपात चिकित्सा सेवा 108 एंबुलेंस में से दो को बच्चों के इलाज के लिए आरक्षित किया गया है। इनमें मास्क और अन्य इंतजाम भी किए गए हैं।
ऐसे करें बच्चों का बचाव
चंपावत। किसी भी वायरस से बचने के लिए रोग प्रतिरोधी क्षमता जरूरी होती है। सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी कहते हैं कि मल्टी विटामिन इसमें खासा मददगार है। बच्चों के खानपान में फल, सब्जियां और दूध की भरपूर मात्रा जरूरी हैं।

सुबह की धूप के जरिये विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा जरूरी है। सीएमओ का कहना है कि कुपोषण में वायरस का खतरा बढ़ जाता है। हल्का-फुल्का व्यायाम और सूर्य नमस्कार कोरोना से बचाव में उपयोगी है।
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