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मुनस्यारी के 14 गांवों में फूंके गए सीएम के पुतले
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मुनस्यारी के 14गांवों में सीएम के दौरे का विरोध करते हुए लोगों ने पुतले फूंके।
- फोटो : PITHORAGARH
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मुनस्यारी/मदकोट/बंगापानी (पिथौरागढ़)। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के बरम दौरे के विरोध में 14 गांवों के लोगों ने उनका पुतला दहन किया। लोगों ने कहा कि दो माह बाद सीएम मात्र एक घंटे के लिए क्षेत्र में आए और खानापूर्ति कर चले गए। प्रभावित क्षेत्रों का मुख्यमंत्री ने दौरा तक नहीं किया।
शुक्रवार को सीएम के दौरे का विरोध करते हुए त्रिस्तरीय पंचायत संगठन की अपील पर पंचायत प्रतिनिधियों ने 14 गांवों में विरोध प्रदर्शन कर सीएम के खिलाफ नारे लगाए। जिपं सदस्य मर्तोलिया ने कहा कि सीएम को बरम सहित बांसबगड़, मुनस्यारी, मदकोट, सेराघाट और धारचूला में उतरकर एक-एक आपदाग्रस्त गांव में जाकर आपदा के विकराल रूप को देखना चाहिए था। एक घंटे के लिए आए सीएम आपदा प्रभावितों के घावों पर नमक डालकर चले गए।
इन गांवों में किया गया सीएम का पुतला दहन
मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। रांथी गांव में गणेश राम, दीपक जंगपांगी, मोहन राम, लक्ष्मण राम, नरेंद्र कुमार, जीतू मेहरा, गौरव कुमार; दरांती गांव में प्रधान लवराज, प्रकाश राम, मनोज कुमार, नारायण सिंह; सेनर गांव में नारायण राम, पंकज टोलिया, गंगा सिंह पांगती, तेज राम, बलवंत राम, हरकोट गांव में प्रधान हेमा मेहरा, गिरधर मेहरा, राजेंद्र चिराल, जगत मेहरा, कविंद्र मेहरा ने सीएम रावत का पुतला फूंककर विरोध जताया। इसके अलावा गैला में अंजना, टांगा में जमन सिंह, धामीगांव भ्यूला में राम सिंह धामी, मनकोट में गोकरण राम, बांसबगड़ में ममता आर्या, पैंकुती में लक्ष्मण सयाला, सेरा सुराईधार में सुरेंद्र सिंह मेहरा, गरघनियां में गजेंद्र सिंह मर्तोलिया और जोशा में राम सिंह के नेतृत्व में पुतला फूंका गया।
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सीएम के भाषण में मुनस्यारी का जिक्र तक नहीं
मुनस्यारी। जिपं सदस्य जगत मर्तोलिया ने कहा कि सीएम ने बरम में आपदा क्षेत्रों का जिक्र करते हुए मुनस्यारी क्षेत्र की आपदा का एक बार भी नाम तक नहीं लिया। उन्होंने कहा कि मुनस्यारी में केदारनाथ जैसी त्रासदी के मंजर अभी भी देखे जा सकते हैं। उसके बावजूद भी सीएम का पहले यहां न आना अब नाम न लेना गंभीर बात है। कहा शनिवार को सीएम के खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा।
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शुक्रवार को सीएम के दौरे का विरोध करते हुए त्रिस्तरीय पंचायत संगठन की अपील पर पंचायत प्रतिनिधियों ने 14 गांवों में विरोध प्रदर्शन कर सीएम के खिलाफ नारे लगाए। जिपं सदस्य मर्तोलिया ने कहा कि सीएम को बरम सहित बांसबगड़, मुनस्यारी, मदकोट, सेराघाट और धारचूला में उतरकर एक-एक आपदाग्रस्त गांव में जाकर आपदा के विकराल रूप को देखना चाहिए था। एक घंटे के लिए आए सीएम आपदा प्रभावितों के घावों पर नमक डालकर चले गए।
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इन गांवों में किया गया सीएम का पुतला दहन
मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। रांथी गांव में गणेश राम, दीपक जंगपांगी, मोहन राम, लक्ष्मण राम, नरेंद्र कुमार, जीतू मेहरा, गौरव कुमार; दरांती गांव में प्रधान लवराज, प्रकाश राम, मनोज कुमार, नारायण सिंह; सेनर गांव में नारायण राम, पंकज टोलिया, गंगा सिंह पांगती, तेज राम, बलवंत राम, हरकोट गांव में प्रधान हेमा मेहरा, गिरधर मेहरा, राजेंद्र चिराल, जगत मेहरा, कविंद्र मेहरा ने सीएम रावत का पुतला फूंककर विरोध जताया। इसके अलावा गैला में अंजना, टांगा में जमन सिंह, धामीगांव भ्यूला में राम सिंह धामी, मनकोट में गोकरण राम, बांसबगड़ में ममता आर्या, पैंकुती में लक्ष्मण सयाला, सेरा सुराईधार में सुरेंद्र सिंह मेहरा, गरघनियां में गजेंद्र सिंह मर्तोलिया और जोशा में राम सिंह के नेतृत्व में पुतला फूंका गया।
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सीएम के भाषण में मुनस्यारी का जिक्र तक नहीं
मुनस्यारी। जिपं सदस्य जगत मर्तोलिया ने कहा कि सीएम ने बरम में आपदा क्षेत्रों का जिक्र करते हुए मुनस्यारी क्षेत्र की आपदा का एक बार भी नाम तक नहीं लिया। उन्होंने कहा कि मुनस्यारी में केदारनाथ जैसी त्रासदी के मंजर अभी भी देखे जा सकते हैं। उसके बावजूद भी सीएम का पहले यहां न आना अब नाम न लेना गंभीर बात है। कहा शनिवार को सीएम के खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा।