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पर्वतारोहण के साथ ही योगेश और शीतल ने उठाया हिमालयी क्षेत्रों को कूड़ा मुक्त बनाने का बीड़ा

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 11 Dec 2021 12:13 AM IST
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Climimbing by Yogesh and Sheetal
दारमा वैली के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सफाई अभियान चलाते बच्चे। - फोटो : PITHORAGARH
पिथौरागढ़। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सड़क के पहुंचने के बाद पर्यटन गतिविधियां बढ़ी हैं। यहां जाने वाले पर्यटक यहां गंदगी फैलाते हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में गंदगी के फैलने से जैव विविधता को काफी नुकसान पहुंच रहा है। ऐसे में एवरेस्ट सहित चोटियों पर आरोहण कर देश और सीमांत जिले का नाम रोशन करने वाले पर्वतारोही योगेश गर्ब्याल और शीतल ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों को कूड़ा मुक्त करने का बीड़ा उठाया।
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एवरेस्ट विजेता योगेश गर्ब्याल और शीतल और ओएनजीसी की पर्वतारोहण दल ने वर्ष 2017 में ओएनजीसी पर्वतारोहण दल में क्लीन हिमालया कैंपस के तहत माउंट एवरेस्ट से 1700 बैग कूड़ा जमाकर उसे निचले क्षेत्रों में पहुंचाकर उसका निस्तारण किया। वर्ष 2018 में माउंट कंचनजंघा से 300 किलो कूड़ा उठाकर निचले क्षेत्रों को पहुंचाकर उसका निस्तारण किया।
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उनकी टीम सीमांत जिले पिथौरागढ़ के उच्च हिमालयी क्षेत्र दारमा, व्यास, चौंदास वैली में समय-समय पर स्वच्छता अभियान चलाकर लोगों और पर्यटकों को पर्यावरण संरक्षण की जानकारी देते हुए उनसे गंदगी ना फैलाने की अपील करते हैं। उनका कहना है कि हिमालय को साफ और स्वच्छ रखना उनकी जिम्मेदारी है। प्रत्येक व्यक्ति को इस ओर आगे बढ़ना चाहिए।
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अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस का इतिहास
यह दिन पर्यावरण में पहाड़ों की भूमिका और जीवन पर इसके प्रभाव को समझने के लिए लोगों को शिक्षित करता है। अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस का गठन 1992 में तब हुआ जब एजेंडा 21 के अध्याय 13 के प्रबंधनीय पारिस्थितिक तंत्र: सतत पर्वत विकास को पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में अपनाया गया। इसमें कोई शक नहीं, इसने पहाड़ों के विकास के इतिहास को एक नया रूप दिया है।

पहाड़ के महत्व की ओर बढ़ते हुए ध्यान को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2002 को संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय पर्वत वर्ष घोषित किया और 11 दिसंबर को 2003 से अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस के रूप में नामित किया। पहली बार अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस 11 दिसंबर 2003 को मनाया गया था। तब से हर साल यह एक विशेष विषय के साथ मनाया जाता है।
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