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चीन से खरीदा ज्यादा, बेचा कम
Thu, 13 Jun 2019 11:53 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन
अमर उजाला ब्यूरो, पिथौरागढ़।
अमर उजाला ब्यूरो, पिथौरागढ़।
Published by: बृजमोहन बृजमोहन
Updated Thu, 13 Jun 2019 11:53 PM IST
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कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग में स्थित गुंजी।
- फोटो : AMAR UJALA
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तिब्बत सीमा पर हो रहे व्यापार में भी चीन का ही दबदबा है। हाल यह है कि पिछले 27 सालों में यहां भारत ने निर्यात की तुलना में करीब छह गुना अधिक आयात किया। खास बात यह भी है कि भारतीय व्यापारी तकलाकोट तो पहुंचते हैं लेकिन 2002 के बाद से कोई भी तिब्बती व्यापारी भारत में व्यापार के केंद्र गुंजी तक नहीं पहुंच रहा है। बताया जा रहा है कि इसका कारण गुंजी में चीन की मुद्रा येन को बदलने की सुविधा का न होना भी है।
1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद भारत-चीन व्यापार पर भी विराम लग गया था। 1992 में विदेश मंत्रालय की देखरेख में एक बार फिर व्यापार शुरू हुआ। वर्ष 2008 को छोड़कर हर साल व्यापारी ट्रेड पास के जरिए तिब्बती मंडी तकलाकोट व्यापार के लिए जाते हैं। 27 साल के आंकड़े देखें तो निर्यात की अपेक्षा आयात अधिक हुआ है। 1992 से वर्ष 2018 तक चीन से 74.87 करोड़ का आयात और 11.98 करोड़ का निर्यात हुआ है। वर्ष 2008 में व्यापार के लिए तिब्बत व्यापारी नहीं गए।
भारत-चीन व्यापार के लिए हर साल करीब 200 से 400 व्यापारी और हेल्पर जाते हैं। वर्ष 1992 से 2018 तक 7604 व्यापारी और हेल्पर व्यापार के लिए तिब्बती मंडी तकलाकोट गए हैं। वर्ष 2002 के बाद तिब्बती व्यापारियों ने भारतीय मंडी गुंजी का रुख नहीं किया है। वर्ष 1992 में सात, वर्ष 1993 में 12, 1994 में शून्य, 1995 में 43, 1996 में 12, 1996, 97, 98 में कोई नही, 1999 में 6, 2000 में 4 , 2001 में कोई नहीं और वर्ष 2002 में दो तिब्बती व्यापारी भारतीय मंडी गुंजी आए।
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भारत से तिब्बत को गुड़, मिश्री, माचिस, मोमो बनाने वाले बर्तन, रेडीमेड कपड़े, सुर्ती, मसाले आदि सामान निर्यात होता है। तिब्बत से कंबल, रजाई, जैकेट, जूते, गर्म कपड़े आदि सामान आयात किया जाता है।
1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद भारत-चीन व्यापार पर भी विराम लग गया था। 1992 में विदेश मंत्रालय की देखरेख में एक बार फिर व्यापार शुरू हुआ। वर्ष 2008 को छोड़कर हर साल व्यापारी ट्रेड पास के जरिए तिब्बती मंडी तकलाकोट व्यापार के लिए जाते हैं। 27 साल के आंकड़े देखें तो निर्यात की अपेक्षा आयात अधिक हुआ है। 1992 से वर्ष 2018 तक चीन से 74.87 करोड़ का आयात और 11.98 करोड़ का निर्यात हुआ है। वर्ष 2008 में व्यापार के लिए तिब्बत व्यापारी नहीं गए।
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भारत-चीन व्यापार के लिए हर साल करीब 200 से 400 व्यापारी और हेल्पर जाते हैं। वर्ष 1992 से 2018 तक 7604 व्यापारी और हेल्पर व्यापार के लिए तिब्बती मंडी तकलाकोट गए हैं। वर्ष 2002 के बाद तिब्बती व्यापारियों ने भारतीय मंडी गुंजी का रुख नहीं किया है। वर्ष 1992 में सात, वर्ष 1993 में 12, 1994 में शून्य, 1995 में 43, 1996 में 12, 1996, 97, 98 में कोई नही, 1999 में 6, 2000 में 4 , 2001 में कोई नहीं और वर्ष 2002 में दो तिब्बती व्यापारी भारतीय मंडी गुंजी आए।
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भारत से तिब्बत को गुड़, मिश्री, माचिस, मोमो बनाने वाले बर्तन, रेडीमेड कपड़े, सुर्ती, मसाले आदि सामान निर्यात होता है। तिब्बत से कंबल, रजाई, जैकेट, जूते, गर्म कपड़े आदि सामान आयात किया जाता है।