{"_id":"644d56bbd2c5d3f349056276","slug":"china-border-village-health-facilities-in-bad-shape-pithoragarh-news-c-8-1-125935-2023-04-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pithoragarh News: चीन सीमा से लगे गांवों में कब मिलेगी स्वास्थ्य सुविधा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pithoragarh News: चीन सीमा से लगे गांवों में कब मिलेगी स्वास्थ्य सुविधा
Sat, 29 Apr 2023 11:11 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sat, 29 Apr 2023 11:11 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिथौरागढ़। चीन और नेपाल सीमा से लगे 21 गांवों के ग्रामीण अब भी स्वास्थ्य सुविधाओं से काफी दूर हैं। यहां के लोगों का मामूली बीमार होने पर सेना, आईटीबीपी और एसएसबी से दवा लेकर काम चल जाता है लेकिन हालत गंभीर होने पर 80 से 120 किमी दूर धारचूला अस्पताल आकर इलाज कराना पड़ता है।
चीन सीमा से लगे दारमा घाटी के 14 गांव दर, नागलिंग, सेला, चल, बालिंग, दुग्तू, सोन, दांतू, बोन, फिलम, तिदांग, गो, मार्छा, सीपू और व्यास घाटी के सात गांव बूंदी, गर्ब्यांग, नपलच्यू, गुंजी, रोंगकांग, नाभी, कुटी में कोई सरकारी अस्पताल नहीं है। हालांकि व्यास घाटी के गुंजी गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रस्तावित किया गया है लेकिन अब तक अस्पताल का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है।
स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर दारमा घाटी में करीब 40 साल पहले माइग्रेशन के दौरान छह माह के लिए अस्थायी चिकित्सालय खोला जाता था लेकिन यह व्यवस्था भी अब नहीं है। दोनों घाटियों के लोगों ने एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की मांग उठाई है। संवाद
विज्ञापन
दारमा घाटी के सीपू और मार्छा गांव सड़क से दूर
पिथौरागढ़। दारमा घाटी के अंतिम गांव सीपू और मार्छा अब तक सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाए हैं। यहां के ग्रामीणों को माइग्रेशन के दौरान धारचूला से ढाकर तक 80 किमी वाहन से यात्रा करने के बाद 10 किमी पैदल चलना पड़ता है। संवाद
दारमा घाटी के 14 गांवों में स्वास्थ्य की कोई सुविधा नहीं है। स्वास्थ्य विभाग साल में एक बार शिविर लगाकर किनारा कर लेता है। बुखार के इलाज के लिए भी उन्हें 80 से 90 किमी की दौड़ लगानी पड़ती है। -जमन सिंह दताल, प्रधान दांतू गांव।
गुंजी में प्रस्तावित पीएचसी का निर्माण जल्द से जल्द शुरू होना चाहिए जिससे पर्यटकों और स्थानीय लोगों को लाभ मिल सके। -सुरेश गुंज्याल, प्रधान गुंजी।
व्यास घाटी के गुंजी में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रस्तावित है। निर्माण कार्य जल्द शुरू हो जाएगा। इसके बाद यहां के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मिलने लगेगी। दारमा घाटी में भी अस्पताल खोलने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। -डॉ.एचएस ह्यांकी, सीएमओ पिथौरागढ़।
विज्ञापन
चीन सीमा से लगे दारमा घाटी के 14 गांव दर, नागलिंग, सेला, चल, बालिंग, दुग्तू, सोन, दांतू, बोन, फिलम, तिदांग, गो, मार्छा, सीपू और व्यास घाटी के सात गांव बूंदी, गर्ब्यांग, नपलच्यू, गुंजी, रोंगकांग, नाभी, कुटी में कोई सरकारी अस्पताल नहीं है। हालांकि व्यास घाटी के गुंजी गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रस्तावित किया गया है लेकिन अब तक अस्पताल का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है।
विज्ञापन
स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर दारमा घाटी में करीब 40 साल पहले माइग्रेशन के दौरान छह माह के लिए अस्थायी चिकित्सालय खोला जाता था लेकिन यह व्यवस्था भी अब नहीं है। दोनों घाटियों के लोगों ने एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की मांग उठाई है। संवाद
विज्ञापन
दारमा घाटी के सीपू और मार्छा गांव सड़क से दूर
पिथौरागढ़। दारमा घाटी के अंतिम गांव सीपू और मार्छा अब तक सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाए हैं। यहां के ग्रामीणों को माइग्रेशन के दौरान धारचूला से ढाकर तक 80 किमी वाहन से यात्रा करने के बाद 10 किमी पैदल चलना पड़ता है। संवाद
दारमा घाटी के 14 गांवों में स्वास्थ्य की कोई सुविधा नहीं है। स्वास्थ्य विभाग साल में एक बार शिविर लगाकर किनारा कर लेता है। बुखार के इलाज के लिए भी उन्हें 80 से 90 किमी की दौड़ लगानी पड़ती है। -जमन सिंह दताल, प्रधान दांतू गांव।
गुंजी में प्रस्तावित पीएचसी का निर्माण जल्द से जल्द शुरू होना चाहिए जिससे पर्यटकों और स्थानीय लोगों को लाभ मिल सके। -सुरेश गुंज्याल, प्रधान गुंजी।
व्यास घाटी के गुंजी में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रस्तावित है। निर्माण कार्य जल्द शुरू हो जाएगा। इसके बाद यहां के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मिलने लगेगी। दारमा घाटी में भी अस्पताल खोलने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। -डॉ.एचएस ह्यांकी, सीएमओ पिथौरागढ़।