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चर्मा घाट पर एक साथ जली सात चिताएं

Sat, 02 Jul 2016 10:42 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, डीडीहाट
ब्यूरो/अमर उजाला, डीडीहाट Updated Sat, 02 Jul 2016 10:42 PM IST
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Charma pier lit up at seven and palpable concerns
चर्मा घाट में हो रहा सामूहिक अंतिम संस्कार - फोटो : अमर उजाला

बस्तड़ी हादसे में मारे गए सात लोगों की चिता शनिवार को एक साथ चर्मा घाट पर लगाई गई। गांव के कई लोग अभी लापता हैं, जिनमें ज्यादातर नौजवान हैं। गांव में मातम का माहौल है। अंत्येष्टि के लिए शवों को घाट तक पहुंचाने में सिंघाली, उड़मा गांव के लोगों ने मदद की। ऐसा मंजर लोगों ने न तो पहले कभी देखा था और न इसकी कल्पना की थी। प्रशासन की बदइंतजामी पर भी लोगों में भारी गुस्सा देखा गया।

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लोगों का कहना था कि प्रशासन ने शवों का पोस्टमार्टम समय पर करने की व्यवस्था नहीं की थी। शनिवार को जब अंत्येष्टि के लिए शव लाए गए तो लकड़ी का भी इंतजाम नहीं था। ओगला पहुंचने पर इन लोगों ने डीएम को भी खरीखोटी सुनाई।
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गमगीन माहौल में चर्मा घाट में शनिवार को गिरीश चंद्र पुत्र गोपाल दत्त, माधवानंद पुत्र मोतीराम, चंद्रबल्लभ पुत्र जयदत्त, रवींद्र पुत्र जयदत्त, दीपा पत्नी चंद्रबल्लभ, रामदत्त पुत्र फकीर दत्त, रघुवर दत्त पुत्र कृष्णानंद की चिताएं एक साथ जली। बस्तड़ी में तो चिता में आग लगाने के लिए तक कई परिवारों के सदस्य ही नहीं बचे हैं। सामूहिक अंतिम संस्कार का मंजर देखकर अन्य लोगों की आंखें भी डबडबा गई। 

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