पिथौरागढ़। कोरोना काल के दो साल बाद देवलसमेत बाबा अपनी 22 बहनों को भिटौला देने के लिए गांव-गांव पहुंचे। पहले दिन 11 गांव में छत्र और देव डोले के प्रतीक रूप में लोक देवता का भव्य स्वागत किया गया। मुख्य छात का आयोजन शनिवार को होगा। मोहल्ला घंटाकरण के शिवमंदिरों में डोले के पहुंचने के बाद लोक पर्व का समापन होगा।
चैत्र चतुर्दशी पर शुक्रवार को चैतोल पर्व का विधिवत शुभारंभ हुआ। विण गांव से ढोल, नगाड़ों के साथ देवल समेत बाबा की छात बहन मां भगवती को डोले देने के रवाना हुए। पहले छात को जटेश्वर महादेव मंदिर तपस्यूड़ में पूजा गया। सेरादेवल मंदिर में मंत्रोच्चार के साथ बाबा का आह्वान किया गया। यहां से छात कोट नामक स्थान पर भूमिया देवस्थल में पहुंची। पूजा, अर्चना और देव डंगरियों का आवाहन करने के बाद छात मखौलिया गांव, देवलाल गांव के लिए रवाना हुई। जहां पर लोगों ने चटकेश्वर की छात का स्वागत किया। इसके बाद छात बस्ते, देवकटिया, घुनसेरागांव, नैनी सैनी, ओड़मत्था, पधेड़ा समेत 11 गांवों तक जाती है और देर रात कासनी पहुंची। इसके बाद अगले 11 गांव में लोक देवता मां भगवती को डोला देने जाएंगे। दौला निवासी पुरुषोत्तम नगरकोटी ने चैतोल मेले में लोगों की बड़ी आस्था है। भगवती मां को देवलसमेत बाबा भिटौला देने जाते हैं। इस दौरान पुजारी गोवर्धन देवलाल, गोकुल देवलाल, शेखर चंद्र नगरकोटी, भगवान सिंह बिष्ट, निर्मल नगरकोटी, महेश चंद्र नगरकोटी, सभासद भावना नगरकोटी, रविंद्र सिंह बिष्ट आदि रहे। इधर लिंठ्यूड़ा गांव में भी शुक्रवार को विधि विधान से पूजा की गई। मां भगवती और भूमिया की छात सिल्थाम, भाटकोट, रई, धनौड़ा होते रई मंदिर तक ले जाया गया। इसके बाद यहां पर पूजा की गई। इस दौरान पूर्व सभासद केदार लुंठी, दीपक लुंठी, रणवीर सिंह लुंठी, राहुल लुंठी, दीपू लुंठी आदि शामिल रहे।