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बस्तड़ी गांव अब रहने लायक नहीं

Thu, 22 Sep 2016 10:03 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, डीडीहाट
ब्यूरो/अमर उजाला, डीडीहाट Updated Thu, 22 Sep 2016 10:03 PM IST
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Bstdi village no longer worth living
बस्तड़ी में आपदा के बाद इस हालत में पहुंचे हैं मकान - फोटो : अमर उजाला

भूवैज्ञानिकों ने शासन को भेजी रिपोर्ट में कहा है कि आपदा प्रभावित बस्तड़ी गांव अब रहने लायक नहीं है। 30 जून की रात बादल फटने की घटना के बाद जमीन की ऊपरी सतह पर मलबा और पानी भर गया है और जमीन की पहली परत कमजोर पड़ गई है। गांव के 55 मकानों में से एक भी मकान अब सुरक्षित नहीं है। ऐसे में गांव के लोगों को तबाह हो चुके स्थान पर बसाने का प्रयास न किया जाए।

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बताया गया कि शासन के निर्देश पर आपदा प्रबंधन विभाग के भूवैज्ञानिकों की टीम ने बस्तड़ी का दौरा किया था। टीम ने पाया कि गांव में अब एक भी पुराना मकान सुरक्षित नहीं है। आपदा के समय जो मकान बच गए थे, उनमें भी जमीनी हलचल के कारण दरार आने लगी है। लोगों के खेतों में इस कदर मलबा पट गया है कि उनमें किसी प्रकार की फसल को उगा पाना संभव नहीं होगा। आपदा प्रबंधन विभाग की इस टीम में भूवैज्ञानिक डा. यूडी उपाध्याय, डा. आरएस राणा समेत अन्य अधिकारी थे। टीम ने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेज दी।
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बस्तड़ी के लोग ठुलखाली नामक स्थान पर बसने के लिए सरकार तथा प्रशासन को प्रस्ताव दे चुके हैं। इस प्रस्ताव में कहा गया है कि ठुलखाली में गांव के लोगों की 500 नाली जमीन है। प्रशासन ने जमीन के कागजातों की जांच भी कर ली है, लेकिन ठुलखाली में पक्के मकानों के निर्माण का कोई प्रयास अब तक नहीं हुआ है। बस्तड़ी के लोग भी अब तबाह हो चुके गांव में नहीं जाना चाहते। भूवैज्ञानिकों की रिपोर्ट के बाद यह तय हो चुका है कि बस्तड़ी अब रहने लायक नहीं है।

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