{"_id":"5b71c8b742c79217e91b9107","slug":"boys-carried-pregnent-lady-11-km-on-foot","type":"story","status":"publish","title_hn":"युवाओं ने गर्भवती महिला को डोली में रखकर नापी 11 किमी की दूरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
युवाओं ने गर्भवती महिला को डोली में रखकर नापी 11 किमी की दूरी
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला (पिथौरागढ़)।
Updated Mon, 13 Aug 2018 11:36 PM IST
विज्ञापन
गर्भवती महिला को डोली में लाते ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
धारचूला के गलाती गांव के युवाओं ने प्रसव पीड़ा से तड़प रही एक गर्भवती महिला की जान बचाने को मूसलाधार बारिश के बीच 11 किमी पैदल चलकर डोली में धारचूला पहुंचाया। महिला को सीएचसी धारचूला में भर्ती किया गया है।
गलाती के दूरस्थ तोक सेकला निवासी बीर सिंह की पत्नी विमला देवी को प्रसव पीड़ा हुई। इस दौरान मूसलाधार बारिश और नदी नालों के उफान पर होने से परिजन चिंतित हो गए।
विमला की पीड़ा समझते हुए गांव के मान सिंह, शेर सिंह, नवीन सिंह ने साहस का परिचय देखते हुए डोली का इंतजाम किया। इसके बाद यह युवा अन्य ग्रामीणों के सहयोग से विमला को डोली में रखकर 11 किलोमीटर धारचूला पहुंचाया। इस दौरान ग्रामीणों को कई स्थानों पर खिसक रही चट्टानों और नदी, नालों के ऊपर बनाए गए कच्चे पुलों में जान जोखिम में डालनी पड़ी।
विज्ञापन
दो जुलाई को आई आपदा से धामीगांव के छह पुल बह गए थे। इसके बाद एक भी पुल का निर्माण नहीं किया गया है। ग्रामीण लकड़ी के कच्चे पुलों पर आवाजाही कर रहे हैं। इन पुलों पर थोड़ी सी चूक भी भरी पड़ सकती है। इसके बावजूद क्षेत्र वासी जान जोखिम में डालकर इन्हीं पुलों में आवाजाही करने को मजबूर हैं। किसी बीमार को अस्पताल पहुंचाने में खासी परेशानी उठानी पड़ रही है।
विज्ञापन
गलाती के दूरस्थ तोक सेकला निवासी बीर सिंह की पत्नी विमला देवी को प्रसव पीड़ा हुई। इस दौरान मूसलाधार बारिश और नदी नालों के उफान पर होने से परिजन चिंतित हो गए।
विज्ञापन
विमला की पीड़ा समझते हुए गांव के मान सिंह, शेर सिंह, नवीन सिंह ने साहस का परिचय देखते हुए डोली का इंतजाम किया। इसके बाद यह युवा अन्य ग्रामीणों के सहयोग से विमला को डोली में रखकर 11 किलोमीटर धारचूला पहुंचाया। इस दौरान ग्रामीणों को कई स्थानों पर खिसक रही चट्टानों और नदी, नालों के ऊपर बनाए गए कच्चे पुलों में जान जोखिम में डालनी पड़ी।
विज्ञापन
दो जुलाई को आई आपदा से धामीगांव के छह पुल बह गए थे। इसके बाद एक भी पुल का निर्माण नहीं किया गया है। ग्रामीण लकड़ी के कच्चे पुलों पर आवाजाही कर रहे हैं। इन पुलों पर थोड़ी सी चूक भी भरी पड़ सकती है। इसके बावजूद क्षेत्र वासी जान जोखिम में डालकर इन्हीं पुलों में आवाजाही करने को मजबूर हैं। किसी बीमार को अस्पताल पहुंचाने में खासी परेशानी उठानी पड़ रही है।