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वरदान संस्था ने 11 साल से बिछड़े भाई-बहन को मिलाया

Sat, 17 Sep 2016 10:26 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला Updated Sat, 17 Sep 2016 10:26 PM IST
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Boon-lost siblings joined the organization 11 years
दिल्ली से बालिका को लेकर धारचूला पहुंचे वरदान संस्था के सदस्य - फोटो : अमर उजाला

बच्चों और महिलाओं के संरक्षण का काम कर रही वरदान संस्था ने 11 वर्ष पहले अनाथ हो चुके भाई-बहन को मिला दिया। मूल रूप से बरेली निवासी दीनू बत्रा 1997 में परिवार सहित धारचूला में आकर बस गए थे। 2005 में एक हादसे में दीनू बत्रा की मौत हो गई, उसके कुछ दिन बाद बीमारी से उनकी पत्नी भी चल बसी और उनके दो बच्चे अनाथ हो गए। इनमें से तब मात्र तीन माह की भूमिका बत्रा को नगर की एक महिला ने पालन-पोषण तथा पढ़ाने के लिए अपने संरक्षण में रख लिया और तब आठ साल की उम्र का उसका भाई मोहित बत्रा एक दुकान में काम करने लगा।

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बताते हैं कि बालिका को पालन-पोषण के लिए ले जाने वाली महिला ने बड़ी होने के बाद उसे स्कूल तो नहीं भेजा। उससे घर का काम कराने लगी। बाद में इस महिला ने दिल्ली में किसी परिवार से संपर्क साधकर उसे दिल्ली भिजवा दिया। जब बालिका की उम्र आठ साल की थी तब उसे दिल्ली रवाना कर दिया गया। वरदान संस्था की अध्यक्ष सुमन वर्मा की जानकारी में पिछले दिनों यह मामला आया। उन्होंने काफी खोजबीन के बाद उस महिला का पता लगाया, जिसने तीन माह की भूमिका को पालन-पोषण के लिए 11 साल पहले अपने साथ रखा था। सुमन वर्मा ने थाना प्रभारी बलवंत कंबोज को भी इस मामले की जानकारी दी।
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पुलिस के सख्त रवैये के सामने महिला ने बता दिया कि बालिका को दिल्ली में किसी के घर पर काम में रखा गया है। सुमन वर्मा और उनके कुछ साथी चार दिन पहले पश्चिमी दिल्ली में उस पते पर पहुंच गए जहां पर बालिका को रखा गया था। शनिवार सुबह सुमन वर्मा भूमिका बत्रा को लेकर धारचूला पहुंच गई। अब वह 11 साल की हो गई है, जबकि उसका भाई मोहित बत्रा 19 साल का हो गया है। मोहित अपना खुद का व्यवसाय चला रहा है। बहन को देखकर मोहित के आंसू छलक गए। उसने कहा कि वह अपनी बहन का पालन-पोषण करने में समर्थ है और उसकी पढ़ाई-लिखाई भी शुरू करेगा।
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वरदान सेवा संस्था की ओर से प्रेमा वर्मा, सावित्री रूंवाल, पुष्पा मर्तोलिया आदि ने बालिका को यहां लाने में मदद की और एक बालिका को गलत हाथों में पड़ने से बचा लिया। थानाध्यक्ष बलवंत कंबोज ने बताया कि मामले में किसी प्रकार के विवाद का शक नहीं था, इसलिए बच्ची को उसके भाई को सुपुर्द किया गया। 

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