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बर्फ की सफेद चादर के साथ खिला बुरांश
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Fri, 14 Apr 2017 10:34 PM IST
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नामिक के जंगल में खिला बुरांश
- फोटो : अमर उजाला
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यूं तो संपूर्ण हिमालयी क्षेत्र खूबसूरत है, वहां कुदरत की नेमत बरसती है, लेकिन नामिक और हीरामणि ग्लेशियर की तलहटी पर बसा नामिक बेहद खूबसूरत है। वसंत के आगमन के स्वागत पर खिलने वाले बुरांश के फूलों से नामिक की खूबसूरती और खिल उठी है। इन दिनों बर्फ की सफेद चादर के साथ खिला बुरांश लोगों को मोहित कर रहा है।
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समुद्र तल से 2700 मीटर की ऊंचाई, सड़क मार्ग से 27 किमी की दूरी पर बसे नामिक में इन दिनों बुरांश की महक फैली है। नामिक गांव के दो किमी ऊपर से 7 किमी दूर शेरसुअरी धार तक का क्षेत्र बुरांश के फूलों से पटा है। बुरांश का अमूमन पेड़ होता है। नामिक में झाड़ीनुमा बुरांश की भी बहुत सी प्रजातियां हैं। झाड़ी और पेड़ों में खिले लाल, गुलाबी बुरांश और जमीन पर बिछी बर्फ की चादर ने सुंदर नामिक को और सुंदर बना दिया है। विडंबना यह है कि नामिक की यह खूबसूरती नामिक में ही दब कर रह जाती है। नामिक तक आम लोगों की पहुंच न होने के कारण लोग इस खूबसूरती के दीदार नहीं कर पाते। नामिक जाने के लिए मुनस्यारी रोड के द्वालीगाड़ से 27 किमी की कठिन पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। यदि बागेश्वर जिले के शामा-गोगिना से नामिक जाना हो तो 8 किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है।
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नामिक को पर्यटन सर्किट से जोड़ने की मांग काफी पुरानी है। नामिक के लोग इसके लिए सबसे पहले मोटर सड़क नामिक पहुंचाने की मांग करते आए हैं। दो वर्ष पहले नामिक के लिए होकरा के पास बला और बागेश्वर के गोगिना से सड़क स्वीकृत की गई। अब तक इन सड़कों का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। नामिक के लोग चाहते हैं कि ये दोनों सड़कें जल्द से जल्द अस्तित्व में आएं, ताकि नामिक देश-दुनिया के लोगों की पहुंच में आ सके और नामिक के लोगों को प्रकृति की नेमत से रोजगार का भी जरिया हासिल हो सके।
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सड़कों का काम तत्काल शुरू होना चाहिए
नामिक की प्रधान तुलसी जेम्याल कहती हैं कि नामिक के लिए स्वीकृत दोनों सड़कों का काम तत्काल शुरू होना चाहिए। नामिक में स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। वह कहती हैं कि सरकार सुविधा उपलब्ध कराए तो पर्यटन, ट्रेकिंग, पर्वतारोहण नामिक को खुशहाल बना सकता है।