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Pithoragarh News: बहनों को भिटौली देने निकले देवलसमेत देवता
Wed, 05 Apr 2023 11:54 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Wed, 05 Apr 2023 11:54 PM IST
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पिथौरागढ़। सीमांत जिले के कई गांवों में चैतोल पर्व की धूम मची है। सोरघाटी में देवलसमेत देवता 22 बहनों को भिटौली देने ढोल-नगाड़ों के साथ निकल गए हैं। बृहस्पतिवार को 11 गांवों में छात (छत्र) घुमाने के बाद चैतोल का समापन हो जाएगा।
विण कोर्ट में बुधवार दोपहर बाद पूजा-अर्चना के बाद ढोल-नगाड़ों की धुन पर देवडांगर अवतरित हुए। उन्होंने लोगों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया। माना जाता है कि देवलसमेत देवता 52 वीर, 64 जोगन, 32 पैरोनी के साथ बहनों को भिटौली देने जाते हैं। पहले दिन देवता की छात मखौली, देवलाल गांव, बस्ते, देकटिया, सिरौली, घुंसेरा गांव, जीबी, ओड़माथा, नैनी, सैनी से कासनी गांव में पहुंचती है।
कासनी में विश्राम होता है और छात रात को वहीं रहेगी। क्षेत्र के जगदीश चंद्र भट्ट ने बताया कि बृहस्पतिवार को चैतोल कुसौली से भड़कटिया, रूइना, सेरादेवल मंदिर से विण पहुंचेेगी। यहां से शाम को करीब तीन बजे चैसर पहुंचेगी। यहां देवता अवतरित होंगे और डोला उठेगा। यहां से वीरों के साथ देवता का डोला और छात धपड़पट्टा, जाखनी, कुमौड़ कोर्ट से घंटाकरण मंदिर पहुंचेगी। यहां से जाखनी से दौला होते हुए वापस विण पहुंचेगी। यहां चैतोल का समापन हो जाएगा। इस मौके पर अजय सिंह महर, विजय महर, सुंदर महर, अशोक महर समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
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वहीं जाखपंत गांव में चैतोल की धूम शुरू हो गई है। ग्रामीण चतुर्दशी के दिन खंडेनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता हरीश चंद्र पंत, दामोदर पंत, मोहन चंद्र पंत, वंशीधर पंत, शंकर पंत, लीलाधर पंत, शंकर पंत, लीलाधर पंत, दीपक, घनश्याम आदि सहयोग दे रहे हैं।कनालीछीना के सतगढ़ गांव में भी देवडांगरों ने अवतरित होकर लोगों को आशीर्वाद दिया। सतगढ़ से पंचकोटी देवता छात लेकर बृहस्पतिवार को ध्वज मंदिर में मां जयंती को भिटौली देने जाएंगे। इस मौके पर दीपक कापड़ी, अंकित, कमल, हीरा बल्लभ, चंद्रशेखर कापड़ी, दिगंबर कापड़ी, विद्यासागर, संजय कापड़ी आदि मौजूद थे।
विण कोर्ट में बुधवार दोपहर बाद पूजा-अर्चना के बाद ढोल-नगाड़ों की धुन पर देवडांगर अवतरित हुए। उन्होंने लोगों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया। माना जाता है कि देवलसमेत देवता 52 वीर, 64 जोगन, 32 पैरोनी के साथ बहनों को भिटौली देने जाते हैं। पहले दिन देवता की छात मखौली, देवलाल गांव, बस्ते, देकटिया, सिरौली, घुंसेरा गांव, जीबी, ओड़माथा, नैनी, सैनी से कासनी गांव में पहुंचती है।
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कासनी में विश्राम होता है और छात रात को वहीं रहेगी। क्षेत्र के जगदीश चंद्र भट्ट ने बताया कि बृहस्पतिवार को चैतोल कुसौली से भड़कटिया, रूइना, सेरादेवल मंदिर से विण पहुंचेेगी। यहां से शाम को करीब तीन बजे चैसर पहुंचेगी। यहां देवता अवतरित होंगे और डोला उठेगा। यहां से वीरों के साथ देवता का डोला और छात धपड़पट्टा, जाखनी, कुमौड़ कोर्ट से घंटाकरण मंदिर पहुंचेगी। यहां से जाखनी से दौला होते हुए वापस विण पहुंचेगी। यहां चैतोल का समापन हो जाएगा। इस मौके पर अजय सिंह महर, विजय महर, सुंदर महर, अशोक महर समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
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वहीं जाखपंत गांव में चैतोल की धूम शुरू हो गई है। ग्रामीण चतुर्दशी के दिन खंडेनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता हरीश चंद्र पंत, दामोदर पंत, मोहन चंद्र पंत, वंशीधर पंत, शंकर पंत, लीलाधर पंत, शंकर पंत, लीलाधर पंत, दीपक, घनश्याम आदि सहयोग दे रहे हैं।कनालीछीना के सतगढ़ गांव में भी देवडांगरों ने अवतरित होकर लोगों को आशीर्वाद दिया। सतगढ़ से पंचकोटी देवता छात लेकर बृहस्पतिवार को ध्वज मंदिर में मां जयंती को भिटौली देने जाएंगे। इस मौके पर दीपक कापड़ी, अंकित, कमल, हीरा बल्लभ, चंद्रशेखर कापड़ी, दिगंबर कापड़ी, विद्यासागर, संजय कापड़ी आदि मौजूद थे।