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नवरात्र में मंदिरों में खामोश रही घंटियों की गूंज
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पिथौरागढ़ में मां उल्का देवी मंदिर में बैठे पुजारी। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : PITHORAGARH
पिथौरागढ़। चैत्र नवरात्र शुरू हो गए हैं। पहली बार मंदिरों में तड़के शंख और घंटियों की गूंज खामोश रही। दूरदराज के मंदिरों में भी नगाड़े नहीं बजे। अलबत्ता फेसबुक और व्हाट्सअप ग्रुप में तड़के से ही नव संवत्सर, नवरात्र के शुभकामना संदेश भेजे जाने लगे। इन संदेशों के साथ मां भगवती से कोरोना महामारी से रक्षा करने की प्रार्थना भी की गई।
नवरात्र शुरू होते ही घंटाकरण, लक्ष्मीनारायण, मां कामाख्या, गुरना पाषाण देवी, ध्वज जयंती देवी, गंगोलीहाट के मां कालिका, पांखू के कोटगाड़ी, अस्कोट के मल्लिकार्जुन मंदिर में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ उमड़ती थी। मंदिरों को बिजली की रंग-बिरंगी मालाओं से सजाया जाता था। श्रद्धालु सुबह से ही पूजा-अर्चना में जुट जाते थे। इस बार लॉकडाउन के चलते मंदिरों में सन्नाटा पसरा है। मंदिरों में सुबह पुजारियों ने पूजा-अर्चना की। बाद में मंदिर भी बंद हो गए। नवरात्र पर नौ दिन का उपवास कर रहे भक्तों ने सुबह कलश की स्थापना कर मां शैलपुत्री की आराधना की। कई भक्तों ने दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हुए सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। मां से कोरोना महामारी से रक्षा करने की भी प्रार्थना की गई।
नव संवत्सर भी नहीं सुना पाए पंडित
पिथौरागढ़। चैत्र प्रतिपदा से नव संवत्सर का भी शुभारंभ हो गया है। नव संवत्सर पर पंडित यजमानों को संवत्सर पढ़ कर सुनाते हैं। नए पंचाग के अनुसार सभी राशियों के बारे में बताया जाता है। वर्ष कैसा रहेगा, फसल कैसी होगी, बारिश कितनी होगी आदि के बारे में जानकारी दी जाती है। इस बार कोरोना के चलते पंडित संवत्सर भी नहीं सुना पाए। इस वर्ष संवत्सर का नाम प्रमादी है। राजा बुध तो मंत्री चंद्रदेव हैं। चंद्र देव के पास मंत्री पद होने से बारिश की अधिकता रहेगी। प्रमादी संवत्सर में वर्ष पर्यंत प्राकृतिक प्रकोप का सामना करना पड़ेगा। रोगों में वृद्धि से चिकित्सालय भरे रहेंगे। आर्थिक मंदी के भी योग भी बन रहे हैं।
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नवरात्र शुरू होते ही घंटाकरण, लक्ष्मीनारायण, मां कामाख्या, गुरना पाषाण देवी, ध्वज जयंती देवी, गंगोलीहाट के मां कालिका, पांखू के कोटगाड़ी, अस्कोट के मल्लिकार्जुन मंदिर में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ उमड़ती थी। मंदिरों को बिजली की रंग-बिरंगी मालाओं से सजाया जाता था। श्रद्धालु सुबह से ही पूजा-अर्चना में जुट जाते थे। इस बार लॉकडाउन के चलते मंदिरों में सन्नाटा पसरा है। मंदिरों में सुबह पुजारियों ने पूजा-अर्चना की। बाद में मंदिर भी बंद हो गए। नवरात्र पर नौ दिन का उपवास कर रहे भक्तों ने सुबह कलश की स्थापना कर मां शैलपुत्री की आराधना की। कई भक्तों ने दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हुए सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। मां से कोरोना महामारी से रक्षा करने की भी प्रार्थना की गई।
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नव संवत्सर भी नहीं सुना पाए पंडित
पिथौरागढ़। चैत्र प्रतिपदा से नव संवत्सर का भी शुभारंभ हो गया है। नव संवत्सर पर पंडित यजमानों को संवत्सर पढ़ कर सुनाते हैं। नए पंचाग के अनुसार सभी राशियों के बारे में बताया जाता है। वर्ष कैसा रहेगा, फसल कैसी होगी, बारिश कितनी होगी आदि के बारे में जानकारी दी जाती है। इस बार कोरोना के चलते पंडित संवत्सर भी नहीं सुना पाए। इस वर्ष संवत्सर का नाम प्रमादी है। राजा बुध तो मंत्री चंद्रदेव हैं। चंद्र देव के पास मंत्री पद होने से बारिश की अधिकता रहेगी। प्रमादी संवत्सर में वर्ष पर्यंत प्राकृतिक प्रकोप का सामना करना पड़ेगा। रोगों में वृद्धि से चिकित्सालय भरे रहेंगे। आर्थिक मंदी के भी योग भी बन रहे हैं।
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