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पेड़ों को बचाने के लिए महिलाओं को समझाती थीं बसंती दीदी

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 27 Jan 2022 11:48 PM IST
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Basanti didi used to explain to women to save trees
बसंती देवी। - फोटो : PITHORAGARH
पिथौरागढ़। पर्यावरण का संकल्प लेकर कोसी को बचाने की मुहिम चलाने वालीं पद्मश्री पुरस्कार के लिए चयनित बसंती दीदी ने पेड़ों को बचाने के लिए काफी संघर्ष किया था। बसंती दीदी ने जंगलों में लकड़ी काटने के लिए जाने वालीं महिलाओं का पीछा तक किया था। वह उन महिलाओं से अक्सर पूछा करती थीं कि यदि कोसी सूख जाए तो उनके पास क्या विकल्प है। उनका यह सवाल पेड़ों का कटान रोकने में बड़ा कारगर साबित हुआ था।
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कौसानी में लक्ष्मी आश्रम में रहने के दौरान बसंती दीदी ने जब पर्यावरण संरक्षण का बीड़ा उठाया था तो उन्हें ग्रामीण महिलाओं को समझाने में तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। उन्होंने इसे चुनौती के रूप में लिया और जंगलों में जाकर पेड़ों को काटने वालीं महिलाओं को समझाना शुरू किया। वह महिलाओं को बतातीं थीं कि पेड़ यदि इसी तरह से काटे गए तो एक दिन गंभीर जल संकट पैदा हो जाएगा। उन्होंने वनों और पेड़ों को बचाने के लिए बातचीत शुरू की। इसका असर यह हुआ कि ग्रामीण लकड़ियों के लिए नए पेड़ों को काटने के बजाय केवल पुरानी लकड़ी जलाने पर राजी हो गए।
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इसके बाद बसंती दीदी ने सामुदायिक समूहों को संगठित किया और वनों को आग से बचाने की दिशा में भी काम किया। इसमें भी उन्हें ग्रामीणों का साथ मिला। धीरे-धीरे वन विकसित हुए और जो झरने गर्मियों में सूख जाते थे, उनमें वर्ष भर पानी बहने लगा। इतना ही नहीं, बसंती दीदी के प्रयास से लोगों में जो जागरूकता आई, उससे विभिन्न प्रजाति के पेड़ों के वन भी नजर आए।
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बसंती दीदी ने बताया कि वनों पर ग्रामीणों का हक
पिथौरागढ़। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वालीं बसंती दीदी ने ग्रामीणों को वनों पर उनके अधिकार से भी अवगत कराया था। उस समय लोगों में वन विभाग के प्रति काफी आक्रोश था लेकिन बसंती दीदी ने ग्रामीणों को बताया कि जंगल उनका है न कि सरकार का और इन जंगलों की रक्षा करना उन्हीं की जिम्मेदारी है। धीरे-धीरे ग्रामीणों ने उनकी बात को माना और जंगलों को अवैध कटान के साथ ही वनाग्नि से भी बचाने की दिशा में कार्य किया।
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