बरार लघु जल विद्युत परियोजना एक साल से बंद
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करीब 750 किलोवाट क्षमता की बरार लघु जल विद्युत परियोजना से उत्पादन एक वर्ष से ठप पड़ा है। शासन ने तीन वर्ष पहले तीन मेगावाट से कम क्षमता वाली सभी बिजली परियोजनाएं लघु जल विद्युत निगम से हटाकर उरेडा को सौंप दी थी। उरेडा ने बरार परियोजना का संचालन खुद करने के बजाए सहारनपुर की बालाजी एंड कंपनी को दे दिया। तभी से इसकी दुर्गति शुरू हो गई। एक वर्ष से इस परियोजना में उत्पादन न होने के कारण थल घाटी के गांवों में बिजली का संकट बढ़ गया है। इस परियोजना से आच्छादित सभी गांवों को ग्रिड से मिलने वाली बिजली पर निर्भर रहना पड़ता है।
बरार लघु जल विद्युत परियोजना का निर्माण 1996 में हुआ था। तब यूपी सरकार ने पहाड़ पर छोटी बिजली परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं का संचालन किया। इनमें से एक बरार परियोजना भी शामिल है। बरार परियोजना ने कई वर्षों तक बेहतरीन उत्पादन किया और इस घाटी के कई गांवों को बिजली उपलब्ध कराई। 2014 में इस परियोजना की देखरेख का काम उरेडा के हाथ में आ गया। तब से परियोजना की दुर्गति होने लगी। पिछले साल नवंबर में परियोजना में कार्यरत छह कर्मचारियों ने वेतन न मिलने के कारण काम छोड़ दिया था। तब से परियोजना की टरबाइन की देखरेख समेत अन्य काम ठप पड़ गए।
बताया गया कि परियोजना के टरबाइन तक पानी पहुंचाने वाली नहर जगह-जगह टूट गई है। इस कारण परियोजना को पानी नहीं मिल पा रहा है। एक साल से परियोजना में उत्पादन न होने से राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है। इसके अलावा गांवों में बिजली का संकट भी गहराने लगा है।
उरेडा के परियोजना अधिकारी अखिलेश शर्मा ने कहा कि परियोजना से उत्पादन शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही मरम्मत का काम शुरू होगा। इसके लिए टेंडर आमंत्रित कर दिए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार छोटी बिजली परियोजनाओं को बढ़ावा देने के बजाए पहले से संचालित परियोजनाओं को ही ठप करने में तुली है। यह इस ऊर्जा प्रदेश के लिए अच्छे लक्षण नहीं हैं।