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बरार जल विद्युत परियोजना आठ मार्च से बंद
ब्यूरो/अमर उजाला, थल (पिथौरागढ़)।
Updated Mon, 24 Apr 2017 10:25 PM IST
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बंद पड़ी बरार लघु जल विद्युत परियोजना।
- फोटो : अमर उजाला
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बरार लघु जल विद्युत परियोजना आठ मार्च से बंद पड़ी है। यह स्थिति तब है जब प्रदेश सरकार छोटी परियोजनाओं से बिजली उत्पादन का दावा करती आ रही है।
750 किलोवाट क्षमता वाली यह विद्युत परियोजना पहले लघु जल विद्युत निगम के पास थी। दो वर्ष से इसका संचालन उरेडा कर रहा है। उरेडा ने सहारनपुर के ठेकेदार लक्ष्मी मित्तल बालाजी को परियोजना संचालन का काम सौंप रखा है। जब से परियोजना निजी हाथों में गई है तब से इसकी दुर्दशा शुरू हो गई। थल के लोगों का कहना है कि थल बाजार की बिजली की जरूरत से ज्यादा उत्पादन यह परियोजना करती थी।
परियोजना के टरबाइन सही हालत में हैं लेकिन नहर जगह जगह टूट जाने से टरबाइन तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। लघु जल विद्युत परियोजना ठप होने के कारण थल क्षेत्र को ग्रिड से बिजली दी गई है। ग्रिड की लाइन काफी लंबी होने से इसमें अक्सर व्यवधान आते रहते हैं और लोगों को अंधेरे में रहना पड़ता है। उरेडा के परियोजना अधिकारी अखिलेश शर्मा का कहना है कि ठेकेदार को तत्काल बिजली उत्पादन शुरू करने के लिए कह दिया गया है। यदि वह जल्दी परियोजना को चालू नहीं करेगा तो उसे नोटिस जारी किया जाएगा। इधर, थल के आसपास की कई छोटी नदियों में बिजली उत्पादन की संभावनाएं हैं लेकिन पहले से बनी योजनाओं का ही सही ढंग से संचालन नहीं हो पा रहा है।
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750 किलोवाट क्षमता वाली यह विद्युत परियोजना पहले लघु जल विद्युत निगम के पास थी। दो वर्ष से इसका संचालन उरेडा कर रहा है। उरेडा ने सहारनपुर के ठेकेदार लक्ष्मी मित्तल बालाजी को परियोजना संचालन का काम सौंप रखा है। जब से परियोजना निजी हाथों में गई है तब से इसकी दुर्दशा शुरू हो गई। थल के लोगों का कहना है कि थल बाजार की बिजली की जरूरत से ज्यादा उत्पादन यह परियोजना करती थी।
परियोजना के टरबाइन सही हालत में हैं लेकिन नहर जगह जगह टूट जाने से टरबाइन तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। लघु जल विद्युत परियोजना ठप होने के कारण थल क्षेत्र को ग्रिड से बिजली दी गई है। ग्रिड की लाइन काफी लंबी होने से इसमें अक्सर व्यवधान आते रहते हैं और लोगों को अंधेरे में रहना पड़ता है। उरेडा के परियोजना अधिकारी अखिलेश शर्मा का कहना है कि ठेकेदार को तत्काल बिजली उत्पादन शुरू करने के लिए कह दिया गया है। यदि वह जल्दी परियोजना को चालू नहीं करेगा तो उसे नोटिस जारी किया जाएगा। इधर, थल के आसपास की कई छोटी नदियों में बिजली उत्पादन की संभावनाएं हैं लेकिन पहले से बनी योजनाओं का ही सही ढंग से संचालन नहीं हो पा रहा है।
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