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सीमांत सड़कें बनाने में बीआरओ की मदद करेगी सेना
उजाला ब्यूरो धारचूला(पिथौरागढ़)।
Updated Mon, 17 Sep 2018 10:55 PM IST
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धारचूला में चिकित्सा शिविर में स्टालों का निरीक्षण करती रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण।
- फोटो : अमर उजाला
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धारचूला(पिथौरागढ़)। केंद्रीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सीमा के लिए बन रही सड़क के निर्माण में सेना बीआरओ की मदद करेगी। यदि कठिन चट्टानों में सड़क निर्माण या टनल के लिए जरूरत पड़ी तो बीआरओ को उपकरण मुहैया कराए जाएंगे। रक्षा मंत्री के इस बयान के बाद सीमांत सड़क निर्माण में तेजी आने की उम्मीद है।
सोमवार को सीमांत के गुंजी, नावीढांग में स्थित सेना की चौकियों के निरीक्षण के बाद मेडिकल कैंप का शुभारंभ करने के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्रीय रक्षा मंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्र की सड़कों के निर्माण में सीमा सड़क संगठन लगा हुआ है। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस सड़क को अतिशीघ्र बनाए जाने के लिए बीआरओ की सेना आवश्यकतानुसार मदद कर रही है। जरूरत पड़ी तो कठिन स्थलों पर सड़क बनाने या टनल के लिए जरूरी उपकरण बीआरओ को मुहैया कराए जाएंगे।
बता दें कि चीन, भारत की सीमा तक सड़क बना चुका है, जबकि भारत की ओर से सीमा के लिए बन रही सड़क का कार्य वर्ष 2007 से अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। धारचूला से लीपूलेख तक बन रही सड़क निर्माण की समय सीमा पहले वर्ष 2014 तय की गई थी, लेकिन खड़ी चट्टानों के कारण गर्बाधार से आगे सड़क निर्माण का काम धीमा पड़ गया। कठिन चट्टानों के कारण सड़क का निर्माण बेहद धीमी गति से चल रहा है।
सोमवार को सीमांत के गुंजी, नावीढांग में स्थित सेना की चौकियों के निरीक्षण के बाद मेडिकल कैंप का शुभारंभ करने के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्रीय रक्षा मंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्र की सड़कों के निर्माण में सीमा सड़क संगठन लगा हुआ है। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस सड़क को अतिशीघ्र बनाए जाने के लिए बीआरओ की सेना आवश्यकतानुसार मदद कर रही है। जरूरत पड़ी तो कठिन स्थलों पर सड़क बनाने या टनल के लिए जरूरी उपकरण बीआरओ को मुहैया कराए जाएंगे।
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बता दें कि चीन, भारत की सीमा तक सड़क बना चुका है, जबकि भारत की ओर से सीमा के लिए बन रही सड़क का कार्य वर्ष 2007 से अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। धारचूला से लीपूलेख तक बन रही सड़क निर्माण की समय सीमा पहले वर्ष 2014 तय की गई थी, लेकिन खड़ी चट्टानों के कारण गर्बाधार से आगे सड़क निर्माण का काम धीमा पड़ गया। कठिन चट्टानों के कारण सड़क का निर्माण बेहद धीमी गति से चल रहा है।
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