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Pithoragarh News: अनीता ने डेयरी व्यवसाय से मजबूत की अपनी आर्थिकी
Wed, 23 Jul 2025 11:37 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Wed, 23 Jul 2025 11:37 PM IST
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पिथौरागढ़। बेड़ीनाग के कालेटी निवासी अनीता दशौनी ने डेयरी व्यवसाय शुरू कर अपनी आर्थिकी को मजबूत किया है। अनीता उन महिलाओं में शामिल हैं जिन्होंने स्वयं का उद्योग स्थापित कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाया है।
अनीता ने रीप परियोजना के अल्ट्रापुअर योजना के तहत 35 हजार रुपये ब्याज रहित ऋण लिया। उन्होंने भैंस खरीद कर डेयरी व्यवसाय शुरू किया। अनीता नजदीक की डेयरी में 40 रुपये लीटर दूध और 700 रुपये किलो घी बेचती हैं। इससे वह सालाना 85 हजार रुपये से अधिक की आमदनी कर रही हैं। अनीता बताती हैं कि शुरू में पशुपालन के साथ बाजार में उत्पादों की बिक्री करना आसान नहीं था। उन्होंने हार नहीं मानी और अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाया। वह मनरेगा में दैनिक मजदूरी और खेती का काम भी कर रही हैं। कहती है कि आजीविका का सीमित साधन होने से उन्होंने डेयरी व्यवसाय करने की सोची। अब वह इस व्यवसाय को और बढ़ाना चाहती हैं।
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अनीता पिंगलीनाग स्वयं सहायता समूह की हैं सदस्य
अनीता पिंगलीनाग स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं और हिमदर्शन संकुल स्तरीय संघ स्वायत्त सहकारिता कांडे से जुड़ी हैं। उन्होंने परियोजना की बैठकों के माध्यम से पशुओं के चारा प्रबंधन, रखरखाव के तरीकों को सीखा। वह अब गांव की दूसरी महिलाओं को भी स्वरोजगार करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। संवाद
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अनीता ने रीप परियोजना के अल्ट्रापुअर योजना के तहत 35 हजार रुपये ब्याज रहित ऋण लिया। उन्होंने भैंस खरीद कर डेयरी व्यवसाय शुरू किया। अनीता नजदीक की डेयरी में 40 रुपये लीटर दूध और 700 रुपये किलो घी बेचती हैं। इससे वह सालाना 85 हजार रुपये से अधिक की आमदनी कर रही हैं। अनीता बताती हैं कि शुरू में पशुपालन के साथ बाजार में उत्पादों की बिक्री करना आसान नहीं था। उन्होंने हार नहीं मानी और अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाया। वह मनरेगा में दैनिक मजदूरी और खेती का काम भी कर रही हैं। कहती है कि आजीविका का सीमित साधन होने से उन्होंने डेयरी व्यवसाय करने की सोची। अब वह इस व्यवसाय को और बढ़ाना चाहती हैं।
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अनीता पिंगलीनाग स्वयं सहायता समूह की हैं सदस्य
अनीता पिंगलीनाग स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं और हिमदर्शन संकुल स्तरीय संघ स्वायत्त सहकारिता कांडे से जुड़ी हैं। उन्होंने परियोजना की बैठकों के माध्यम से पशुओं के चारा प्रबंधन, रखरखाव के तरीकों को सीखा। वह अब गांव की दूसरी महिलाओं को भी स्वरोजगार करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। संवाद
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