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23 वर्ष बाद भी केवल रिले केंद्र की भूमिका निभा रहा आकाशवाणी केंद्र
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पिथौरागढ़ का आकाशवाणी केंद्र। संवाद
- फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। जिला मुख्यालय में वर्ष 1997 में स्थापित रेडियो स्टेशन मात्र रिले केंद्र बनकर रह गया है। अल्मोड़ा और दिल्ली आकाशवाणी केंद्रों के प्रचारित कार्यक्रमों को यहां से रिले किया जाता है। इस आकाशवाणी केंद्र में पहले 10 अधिकारी और कर्मचारी थे, अब केंद्र में मात्र पांच ही कर्मचारी तैनात हैं।
पिथौरागढ़ में 135 से अधिक नाली जमीन पर बने रेडियो स्टेशन को लेकर जिले की जनता को काफी आस थी। 23 वर्ष बाद भी पिथौरागढ़ रेडियो स्टेशन को केवल अल्मोड़ा के कार्यक्रमों को यहां से रिले करने का अधिकार है। मीडियम वेब पर 1602 किलो हर्ट्ज पर शाम पांच बजे से रात 10:30 बजे तक केंद्र का सिंगल ट्रांसमीटर ऑन किया जाता है। शनिवार और रविवार को रात 11:20 बजे तक प्रसारण होता है।
स्टूडियो नहीं होने से यहां से सिर्फ अल्मोड़ा और दिल्ली के कार्यक्रमों का रिले ही हो रहा है। ऐसे केंद्र का कोई औचित्य नहीं है। आज के दौर में भी कार्यक्रमों के लिए बाहर जाना पड़ रहा हो तब केंद्र का क्या मतलब।
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- हेमराज बिष्ट, संस्कृति कर्मी, पिथौरागढ़।
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पिथौरागढ़ में 135 से अधिक नाली जमीन पर बने रेडियो स्टेशन को लेकर जिले की जनता को काफी आस थी। 23 वर्ष बाद भी पिथौरागढ़ रेडियो स्टेशन को केवल अल्मोड़ा के कार्यक्रमों को यहां से रिले करने का अधिकार है। मीडियम वेब पर 1602 किलो हर्ट्ज पर शाम पांच बजे से रात 10:30 बजे तक केंद्र का सिंगल ट्रांसमीटर ऑन किया जाता है। शनिवार और रविवार को रात 11:20 बजे तक प्रसारण होता है।
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स्टूडियो नहीं होने से यहां से सिर्फ अल्मोड़ा और दिल्ली के कार्यक्रमों का रिले ही हो रहा है। ऐसे केंद्र का कोई औचित्य नहीं है। आज के दौर में भी कार्यक्रमों के लिए बाहर जाना पड़ रहा हो तब केंद्र का क्या मतलब।
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- हेमराज बिष्ट, संस्कृति कर्मी, पिथौरागढ़।