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पूर्व फौजी ने बागवानी में दिखाया कमाल
केबी पाल/अमर उजाला, अस्कोट (पिथौरागढ़)।
Updated Thu, 10 Dec 2015 11:00 PM IST
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कहते हैं कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। ऐसा ही कुछ देखने को मिला है अस्कोट के मेलखेत (खोलियागांव) में, जहां एक पूर्व फौजी ने अपने दम पर 80 नाली जमीन में फलों का बगीचा विकसित किया है।
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कभी सेना की ओर से नेशनल फुटबाल में दम दिखाने वाले 80 वर्षीय कर्ण बहादुर पाल के बगीचे में आज संतरा, माल्टा, आम, अमरूद, आड़ू, पुलम, नींबू, काफल, अखरोट के विभिन्न प्रजातियों के फलों फलते हैं। अफसोस यह है कि बाजार के अभाव के कारण इस मेहनती बागवान को उसकी लगन, मेहनत का वाजिब मेहनताना नहीं मिल पा रहा है।
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वर्ष 1978 में बंगाल इंजीनियर से रिटायर होने वाले कर्ण बहादुर पाल ने अपने बाग में सबसे पहले बांज और काफल के पौधे लगाए। फिर और फलों के पौधे रोपे। आज कर्ण बहादुर के बाग में संतरा के 110, माल्टा के 70, आम के 60, अमरूद के 30, आड़ू के 25, पुलम के 25, नीबू के 30, अखरोट के 150 फलदार पौधे हैं, जो हर साल फलों से लदे रहते हैं।
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बागवानी के काम में उनके एकलौते पुत्र इंद्र बहादुर पाल हाथ बंटाते हैं। कर्ण बहादुर बताते हैं कि उनके बाग में हर साल 90 से 95 क्विंटल फल पैदा होता है। दो किमी दूर अस्कोट लाकर फल बेचते हैं। ट्रांसपोर्ट की सुविधा और बाजार का अभाव होने के कारण 50 प्रतिशत फल बर्बाद हो जाते हैं।
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड ने किया है पुरस्कृत
बागवानी के क्षेत्र में बेहतरीन काम कर रहे बागवान कर्ण बहादुर पाल को वर्ष 2008 में राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड ने पुरस्कार प्रदान किया था।
वे कहते हैं कि सरकारी सुविधा के रूप में उन्हें उद्यान विभाग पौध अवश्य उपलब्ध कराता है। पहले एक किमी दूर से पानी लाकर पौधों की सिंचाई करते थे, अब घर के पास पानी है। उनका कहना है कि सरकार प्रोत्साहन दे तो इस काम को और बढ़ाया जा सकता है।
बंदरों की मार बागवानी पर
कर्ण बहादुर पाल के बाग को बंदर, पशु, पक्षी नुकसान पहुंचाते हैं। बताते हैं कि बंदरों से बाग की सुरक्षा के लिए उन्होंने चार कुत्ते पाले थे, तीन कुत्ते बंदरों के हमले में मारे गए हैं। 2013 की आपदा में भी उनके बाग को नुकसान पहुंचा।
मैं खुद कर्ण बहादुर पाल के बाग का जायजा लूंगी। अभी माल्टा की खरीद के लिए कनालीछीना में विपणन केंद्र खोला गया है, वहां पर माल्टा बेच सकते हैं। भविष्य में उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के पूरे प्रयास होंगे। - डा. मीनाक्षी जोशी जिला उद्यान अधिकारी पिथौरागढ़।