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अस्थायी पुलों से सफर कर रहे लोगों की चिंता नहीं
Pithoragarh
Updated Wed, 16 Jul 2014 04:16 PM IST
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धारचूला (पिथौरागढ़)। आपदा प्रभावित इलाकों में तेजी से पुनर्निर्माण करने का दावा करने वाली प्रदेश सरकार को अस्थायी पुलों से सफर कर रहे लोगों की पीड़ा का आभास तक नहीं है। अब तक इन खतरनाक पुलों से आरपार जाने वाले ग्रामीणों के सामने नई समस्या खड़ी होने वाली है। यह अस्थायी पुल नदियों का जल स्तर बढ़ते ही किसी भी वक्त बह जाएंगे। यदि अस्थायी पुल बह गए तो लोगों को गांव से बाहर निकलने के लिए आछ किलोमीटर का अतिरिक्त सफर करना पड़ेगा।
तीजम गांव को जोड़ने के लिए नाले में ग्रामीणों ने खुद ही अस्थायी पुल का निर्माण किया है। तीजम नाले में बना पुल पिछले साल आपदा की भेंट चढ़ गया था। सरकार ने एक साल पूरा होने पर भी नए पुल का निर्माण शुरू नहीं किया है। लोगों ने लकड़ी के लट्ठे और तख्ते डालकर जो अस्थायी पुल बनाया है वह भी गंभीर खतरे में आ गया है। ठीक इसी तरह सोबला नाले को पार करने के लिए लोगों ने लकड़ी के लट्ठे डाल रखे हैं। जिस स्थान पर यह लट्ठे डाले गए हैं उसके एक किनारे भूस्खलन होने लगा है। यदि तेज बारिश होती है तो लकड़ी के यह लट्ठे बह जाएंगे और लोगों के सामने आवागमन की समस्या आ जाएगी।
सामाजिक कार्यकर्ता गंगा सुयाल ने उपजिलाधिकारी से भेंटकर सोबला, तीजम, दर, बौंगलिंग, सुमदुम में तत्काल पक्के पुलों का निर्माण करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि भारी मुसीबत में आवागमन कर रहे लोगों के लिए स्थायी इंतजाम होने चाहिए। उपजिलाधिकारी प्रमोद कुमार ने कहा कि सभी क्षतिग्रस्त पुलों की रिपोर्ट जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजी जा चुकी है। उम्मीद है कि जल्दी ही इनके लिए धन मंजूर हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जितने भी पुल टूटे हैं उनकी जगह नए पुल बनाए जाएंगे।
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तीजम गांव को जोड़ने के लिए नाले में ग्रामीणों ने खुद ही अस्थायी पुल का निर्माण किया है। तीजम नाले में बना पुल पिछले साल आपदा की भेंट चढ़ गया था। सरकार ने एक साल पूरा होने पर भी नए पुल का निर्माण शुरू नहीं किया है। लोगों ने लकड़ी के लट्ठे और तख्ते डालकर जो अस्थायी पुल बनाया है वह भी गंभीर खतरे में आ गया है। ठीक इसी तरह सोबला नाले को पार करने के लिए लोगों ने लकड़ी के लट्ठे डाल रखे हैं। जिस स्थान पर यह लट्ठे डाले गए हैं उसके एक किनारे भूस्खलन होने लगा है। यदि तेज बारिश होती है तो लकड़ी के यह लट्ठे बह जाएंगे और लोगों के सामने आवागमन की समस्या आ जाएगी।
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सामाजिक कार्यकर्ता गंगा सुयाल ने उपजिलाधिकारी से भेंटकर सोबला, तीजम, दर, बौंगलिंग, सुमदुम में तत्काल पक्के पुलों का निर्माण करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि भारी मुसीबत में आवागमन कर रहे लोगों के लिए स्थायी इंतजाम होने चाहिए। उपजिलाधिकारी प्रमोद कुमार ने कहा कि सभी क्षतिग्रस्त पुलों की रिपोर्ट जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजी जा चुकी है। उम्मीद है कि जल्दी ही इनके लिए धन मंजूर हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जितने भी पुल टूटे हैं उनकी जगह नए पुल बनाए जाएंगे।
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