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बाबा अलखनाथ के मंदिर में खुदा पूजा की धूम
Pithoragarh
Updated Thu, 12 Dec 2013 05:48 AM IST
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मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। होकरा के बाबा अलखनाथ के मंदिर में मंगलवार और बुधवार को खुदा पूजा की धूम रही। सात, नौ और बारह साल में होने वाली इस पूजा में होकरा, खोयम और गौला तीन गांवों के 235 परिवारों ने शिरकत की और पूजा में एक करोड़ रुपये से अधिक का खर्च आया।
10 दिसंबर मंगलवार को दोपहर ढाई बजे मंदिर में बाबा अलखनाथ का डोला उठा। नियम के अनुसार लोग देवडांगरों के साथ पैय्या (पदम) के पेड़ के पास पहुंचते हैं। पेड़ की पूजा के बाद देव डांगर पेड़ की पत्तियों और टहनियों को तोड़ते हैं। पत्तियां और टहनियां मंदिर के पुजारी को दी जाती हैं। इसके बाद अलखनाथ के मंदिर में पूजा होती है। गेहूं के आटे और जमाली के चावल का भोग लगाया जाता है। शिवजी (अलखनाथ) की आराधना के साथ ही त्रिशूल की पूजा की जाती है। प्रत्येक परिवार के अलग अलग चूल्हे लगाए जाते हैं। आयोजन के तहत मंगलवार की रात बकरियां काटी गईं।।
बुधवार को भंडारे का आोजन होता है लोगों कोप्रसाद बांटा जाता है। इस बार यह आयोजन 12 साल बाद हुआ। होकरा के अलावा सैंणराथी, समकोट, बला, चौना, वल्थी आदि गांवों में भी खुदा पूजा होती है।
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10 दिसंबर मंगलवार को दोपहर ढाई बजे मंदिर में बाबा अलखनाथ का डोला उठा। नियम के अनुसार लोग देवडांगरों के साथ पैय्या (पदम) के पेड़ के पास पहुंचते हैं। पेड़ की पूजा के बाद देव डांगर पेड़ की पत्तियों और टहनियों को तोड़ते हैं। पत्तियां और टहनियां मंदिर के पुजारी को दी जाती हैं। इसके बाद अलखनाथ के मंदिर में पूजा होती है। गेहूं के आटे और जमाली के चावल का भोग लगाया जाता है। शिवजी (अलखनाथ) की आराधना के साथ ही त्रिशूल की पूजा की जाती है। प्रत्येक परिवार के अलग अलग चूल्हे लगाए जाते हैं। आयोजन के तहत मंगलवार की रात बकरियां काटी गईं।।
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बुधवार को भंडारे का आोजन होता है लोगों कोप्रसाद बांटा जाता है। इस बार यह आयोजन 12 साल बाद हुआ। होकरा के अलावा सैंणराथी, समकोट, बला, चौना, वल्थी आदि गांवों में भी खुदा पूजा होती है।
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