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मंगलवार को भी जारी रहा डायवर्जन का कार्य
Updated Tue, 19 Jun 2018 11:56 PM IST
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नाचनी (पिथौरागढ़)। रामगंगा नदी में डायवर्जन का कार्य मंगलवार को भी जारी रहा। भैंसखाल गांव की ओर बोल्डर पाटने से नदी अपने मूल स्थान की ओर बहने लगी है।
28 मई से 15 जून तक नदी में डायवर्जन का कार्य किया गया। भैंसखाल गांव की ओर बह रही नदी का रुख मूल स्थान की ओर पलटाने के लिए 240 मीटर लंबा चैनल बनाया गया। चार दिन पहले चैनल का चार मीटर का हिस्सा बह गया था, जिससे नदी भैंसखाल गांव की ओर बहने लगी थी। रविवार को उपजिलाधिकारी केएन गोस्वामी के निर्देश पर बोल्डर डालकर टूटे हिस्से को पाटा गया लेकिन एक मीटर का हिस्सा नहीं पाटा जा सका, जिससे नदी का 50 प्रतिशत पानी गांव की ओर बह रहा था।
मंगलवार को भी एसडीएम के निर्देश पर राजस्व निरीक्षक हरीश भट्ट और वन रक्षक रमेश लोधियाल ने पोकलेंड से नदी में बोल्डर डलवाए। गांव की ओर बोल्डर पाटने से नदी अपने मूल स्थान में बहने लगी है, इससे लोगों ने राहत की सांस ली है। लोगों ने उपजिलाधिकारी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इससे गांव की जमीन को नुकसान होने से बचेगा। बता दें कि नदी का रुख मूल स्थान से गांव की ओर होने से गांव में भूकटाव हो रहा था। लोगों की बेशकीमती जमीन नदी में बह रही थी।
28 मई से 15 जून तक नदी में डायवर्जन का कार्य किया गया। भैंसखाल गांव की ओर बह रही नदी का रुख मूल स्थान की ओर पलटाने के लिए 240 मीटर लंबा चैनल बनाया गया। चार दिन पहले चैनल का चार मीटर का हिस्सा बह गया था, जिससे नदी भैंसखाल गांव की ओर बहने लगी थी। रविवार को उपजिलाधिकारी केएन गोस्वामी के निर्देश पर बोल्डर डालकर टूटे हिस्से को पाटा गया लेकिन एक मीटर का हिस्सा नहीं पाटा जा सका, जिससे नदी का 50 प्रतिशत पानी गांव की ओर बह रहा था।
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मंगलवार को भी एसडीएम के निर्देश पर राजस्व निरीक्षक हरीश भट्ट और वन रक्षक रमेश लोधियाल ने पोकलेंड से नदी में बोल्डर डलवाए। गांव की ओर बोल्डर पाटने से नदी अपने मूल स्थान में बहने लगी है, इससे लोगों ने राहत की सांस ली है। लोगों ने उपजिलाधिकारी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इससे गांव की जमीन को नुकसान होने से बचेगा। बता दें कि नदी का रुख मूल स्थान से गांव की ओर होने से गांव में भूकटाव हो रहा था। लोगों की बेशकीमती जमीन नदी में बह रही थी।
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