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मौसम की बेरुखी से किसानों में मायूसी
Updated Wed, 10 Jan 2018 10:38 PM IST
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पिथौरागढ़। जिले में इस बार सूखे की गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। इससे किसानों में मायूसी है। अधिकांश स्थानों पर जमीन पर बोया गया बीज अंकुरित नहीं हुआ है। जो बीज उगे हैं तो उनकी वृद्धि नमी की कमी के कारण रुक गई है। जिले में सितंबर के बाद बारिश की बूंद नहीं गिरी है। किसानों को चिंता है कि इस बार बीज की व्यवस्था भी कहां से की जाएगी।
सूखे का असर मुख्य फसल के साथ-साथ सब्जी पर भी पड़ रहा है। किसान चाहते हैं कि सरकार जल्दी से सूखे का सर्वे करे और किसानों को राहत राशि दे। वैसे भी पहाड़ पर किसान जंगली जानवरों के आतंक से परेशान हैं। जो फसल जंगली जानवरों से बचाकर रखी है उस पर अब सूखे की मार पड़ गई है।
जिले के आठों विकासखंडों में सूखे की स्थिति एक सी है। किसानों को यह चिंता सता रही है कि इस बार अपने लिए राशन और जानवरों के लिए चारे की व्यवस्था कैसे की जाए। जिले में कम जमीन वाले किसानों की संख्या बहुत ज्यादा है। कुछ परिवार अपने लिए राशन की तीन-चार महीने की ही व्यवस्था कर पाते हैं। इस बार ऐसा भी संभव नहीं दिख रहा है।
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गरीब किसान गंभीर संकट में
देवलथल के पास आगर निवासी किसान होशियार राम का कहना है कि पहाड़ की खेती का बड़ा हिस्सा जंगली जानवर चट कर रहे हैं। इस बार रही सही कसर सूखे ने निकाल दी। वह कहते हैं कि अब सरकार को देरी नहीं करनी चाहिए और सूखे का शीघ्र आकलन कर किसानों को मदद देनी चाहिए। वह कहते हैं कि इस बार गरीब किसान गंभीर संकट में आ गए हैं।
सरकारी दुकानों से पर्याप्त राशन दें
उड़ाई निवासी किसान चंदर राम का कहना है कि सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के राशन में कटौती कर दी है। खेत सूख गए हैं। ऐसे में गरीबों के पास कोई चारा नहीं बचता। उन्होंने कहा कि सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों से लोगों को पर्याप्त मात्रा में सस्ता राशन उपलब्ध कराया जाए। साथ ही किसानों के सारे कर्ज माफ किए जाएं।
सरकार किसानों के बारे में नहीं सोचती
सातशिलिंग निवासी रामप्रसाद का कहना है कि सरकार पहाड़ के किसानों के बारे में कभी नहीं सोचती। जंगली जानवरों का आतंक समाप्त करने की बात हर सरकार ने की, लेकिन अब तक कोई नीति नहीं बन पाई। सूखा, बाढ़ के नाम पर सर्वे तो होता है, लेकिन असली प्रभावित वंचित रह जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी नीति बनाए, जिसका सभी को लाभ मिल सके।
सूखे की स्थिति का सर्वे किया जाए
चमाली निवासी किसान केशर सिंह का कहना है कि सूखे का सर्वे किया जाए और हर किसान को पर्याप्त मुआवजा दिया जाए। वह कहते हैं कि इससे पहले मुआवजा वितरण में जिस तरह की मनमानी हुई वैसा नहीं होना चाहिए। वह कहते हैं कि पहाड़ के किसान को शीघ्र मदद मिले और सूखे की स्थिति से निपटने के लिए सरकार ठोस कदम उठाए।
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सूखे का असर मुख्य फसल के साथ-साथ सब्जी पर भी पड़ रहा है। किसान चाहते हैं कि सरकार जल्दी से सूखे का सर्वे करे और किसानों को राहत राशि दे। वैसे भी पहाड़ पर किसान जंगली जानवरों के आतंक से परेशान हैं। जो फसल जंगली जानवरों से बचाकर रखी है उस पर अब सूखे की मार पड़ गई है।
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जिले के आठों विकासखंडों में सूखे की स्थिति एक सी है। किसानों को यह चिंता सता रही है कि इस बार अपने लिए राशन और जानवरों के लिए चारे की व्यवस्था कैसे की जाए। जिले में कम जमीन वाले किसानों की संख्या बहुत ज्यादा है। कुछ परिवार अपने लिए राशन की तीन-चार महीने की ही व्यवस्था कर पाते हैं। इस बार ऐसा भी संभव नहीं दिख रहा है।
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गरीब किसान गंभीर संकट में
देवलथल के पास आगर निवासी किसान होशियार राम का कहना है कि पहाड़ की खेती का बड़ा हिस्सा जंगली जानवर चट कर रहे हैं। इस बार रही सही कसर सूखे ने निकाल दी। वह कहते हैं कि अब सरकार को देरी नहीं करनी चाहिए और सूखे का शीघ्र आकलन कर किसानों को मदद देनी चाहिए। वह कहते हैं कि इस बार गरीब किसान गंभीर संकट में आ गए हैं।
सरकारी दुकानों से पर्याप्त राशन दें
उड़ाई निवासी किसान चंदर राम का कहना है कि सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के राशन में कटौती कर दी है। खेत सूख गए हैं। ऐसे में गरीबों के पास कोई चारा नहीं बचता। उन्होंने कहा कि सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों से लोगों को पर्याप्त मात्रा में सस्ता राशन उपलब्ध कराया जाए। साथ ही किसानों के सारे कर्ज माफ किए जाएं।
सरकार किसानों के बारे में नहीं सोचती
सातशिलिंग निवासी रामप्रसाद का कहना है कि सरकार पहाड़ के किसानों के बारे में कभी नहीं सोचती। जंगली जानवरों का आतंक समाप्त करने की बात हर सरकार ने की, लेकिन अब तक कोई नीति नहीं बन पाई। सूखा, बाढ़ के नाम पर सर्वे तो होता है, लेकिन असली प्रभावित वंचित रह जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी नीति बनाए, जिसका सभी को लाभ मिल सके।
सूखे की स्थिति का सर्वे किया जाए
चमाली निवासी किसान केशर सिंह का कहना है कि सूखे का सर्वे किया जाए और हर किसान को पर्याप्त मुआवजा दिया जाए। वह कहते हैं कि इससे पहले मुआवजा वितरण में जिस तरह की मनमानी हुई वैसा नहीं होना चाहिए। वह कहते हैं कि पहाड़ के किसान को शीघ्र मदद मिले और सूखे की स्थिति से निपटने के लिए सरकार ठोस कदम उठाए।