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रं जनजाति की कहानियों और लोकोक्तियों का संग्रह होगा
Updated Wed, 01 Nov 2017 10:51 PM IST
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धारचूला (पिथौरागढ़)। रं संस्कृति में प्रचलित कहानियों और लोकोक्तियों का अब संग्रह किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ी इस परंपरा के बारे में जान सके। रं समाज के लोग तेजी से अपने मूल गांवों को छोड़ते जा रहे हैं। इस कारण उनकी कई प्राचीन कथाओं का अस्तित्व समाप्त हो रहा है। यदि समय रहते इनका संग्रह और संरक्षण नहीं होगा तो आने वाले समय में कई किस्से और कहानियां समाप्त हो जाएंगी।
डीएसबी परिसर नैनीताल में इतिहास के विभागाध्यक्ष डॉ. गिरधर नेगी ने बुधवार को यहां पहुंचकर रं संस्कृति के बारे में जानकारी हासिल की। डॉ. नेगी रं संग्रहालय में गए और कई प्राचीन वस्तुओं का अध्ययन किया। डॉ. नेगी ने 1985 में रं जनजाति की संस्कृति पर शोध किया था। उन्होंने कहा कि अब नए सिरे से रं संस्कृति का अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि रं संस्कृति में प्रचलित लोकोक्तियों को लिपिबद्ध किया जाएगा और उनका हिंदी अनुवाद भी किया जाएगा, ताकि सभी लोग इन लोकोक्तियों का अर्थ समझ सकें।
उन्होंने रं संग्रहालय में रखी प्राचीन वस्तुओं को देखने के बाद कहा कि यह प्रयास सराहनीय है। इससे अध्ययन में आसानी होगी। डॉ. नेगी अब बरम, मदकोट, मुनस्यारी होते हुए मिलम तक जाएंगे और उस क्षेत्र में एक माह तक रहेंगे।
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डीएसबी परिसर नैनीताल में इतिहास के विभागाध्यक्ष डॉ. गिरधर नेगी ने बुधवार को यहां पहुंचकर रं संस्कृति के बारे में जानकारी हासिल की। डॉ. नेगी रं संग्रहालय में गए और कई प्राचीन वस्तुओं का अध्ययन किया। डॉ. नेगी ने 1985 में रं जनजाति की संस्कृति पर शोध किया था। उन्होंने कहा कि अब नए सिरे से रं संस्कृति का अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि रं संस्कृति में प्रचलित लोकोक्तियों को लिपिबद्ध किया जाएगा और उनका हिंदी अनुवाद भी किया जाएगा, ताकि सभी लोग इन लोकोक्तियों का अर्थ समझ सकें।
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उन्होंने रं संग्रहालय में रखी प्राचीन वस्तुओं को देखने के बाद कहा कि यह प्रयास सराहनीय है। इससे अध्ययन में आसानी होगी। डॉ. नेगी अब बरम, मदकोट, मुनस्यारी होते हुए मिलम तक जाएंगे और उस क्षेत्र में एक माह तक रहेंगे।
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