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बलुवाकोट के थौड़ा गांव में पागल कुते का आतंक
Updated Fri, 13 Oct 2017 10:43 PM IST
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पिथौरागढ़। तहसील धारचूला के अंतर्गत बलुवाकोट से पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित थौड़ा गांव में पागल कुत्ते का आतंक मचा है। पागल कुत्ते के काटने से अब तक छह जानवरों की मौत हो चुकी है। दस अन्य जानवरों को भी पागल कुत्ते ने काट दिया है। एक भैंस पागल हो गई है। इससे पूरे गांव में दहशत का माहौल है। अब लोग इस बात से डरे हैं कि कहीं रैबीज का असर लोगों पर न हो जाए।
बताया गया कि करीब एक सप्ताह से गांव में पागल कुत्ते का आतंक शुरू हो गया। पागल कुत्ते के काटने से आन सिंह की गाय, कमान सिंह का बैल, गोविंद राम की गाय, रूप सिंह के दो गाय और एक बैल मर गए। धरम सिंह की भैंस पागल हो गई है। सूचना पर गांव पहुंचे पशु चिकित्साधिकारी डॉ. मोहम्मद खालिद ने कहा कि जिन जानवरों को पागल कुत्ते ने काटा है उनको गोशाला में अन्य जानवरों के साथ न बांधा जाए। यदि संभव हो तो ऐसे जानवरों को जंगल में छोड़ दिया जाए। उन्होंने कहा कि रैबीज का संक्रमण भी होता है और लोगों पर भी असर पड़ने की आशंका है।
सामाजिक कार्यकर्ता चंचल सिंह ऐरी ने बताया कि गांव में दहशत का माहौल है। उन्होंने धारचूला के एसडीएम आरके पांडे, तहसीलदार आईबी मल्ल को पूरे मामले की जानकारी दी और लोगों का इलाज करने के लिए गांव में चिकित्सा शिविर लगाने की मांग की। एसडीएम ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. एमएस जायसवाल और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विद्याधर कापड़ी को पत्र लिखकर कहा कि शीघ्र रोकथाम के उपाय किए जाएं।
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बताया गया कि करीब एक सप्ताह से गांव में पागल कुत्ते का आतंक शुरू हो गया। पागल कुत्ते के काटने से आन सिंह की गाय, कमान सिंह का बैल, गोविंद राम की गाय, रूप सिंह के दो गाय और एक बैल मर गए। धरम सिंह की भैंस पागल हो गई है। सूचना पर गांव पहुंचे पशु चिकित्साधिकारी डॉ. मोहम्मद खालिद ने कहा कि जिन जानवरों को पागल कुत्ते ने काटा है उनको गोशाला में अन्य जानवरों के साथ न बांधा जाए। यदि संभव हो तो ऐसे जानवरों को जंगल में छोड़ दिया जाए। उन्होंने कहा कि रैबीज का संक्रमण भी होता है और लोगों पर भी असर पड़ने की आशंका है।
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सामाजिक कार्यकर्ता चंचल सिंह ऐरी ने बताया कि गांव में दहशत का माहौल है। उन्होंने धारचूला के एसडीएम आरके पांडे, तहसीलदार आईबी मल्ल को पूरे मामले की जानकारी दी और लोगों का इलाज करने के लिए गांव में चिकित्सा शिविर लगाने की मांग की। एसडीएम ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. एमएस जायसवाल और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विद्याधर कापड़ी को पत्र लिखकर कहा कि शीघ्र रोकथाम के उपाय किए जाएं।
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