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बुरी तरह दरक रही कुलथम की धरती
Updated Sun, 19 Aug 2018 10:36 PM IST
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पिथौरागढ़। दशकों से आपदा का दंश झेल रहे मुनस्यारी के कुलथम की जमीन दरक रही है। भूमि दरकने से कुलथम गांव रहने लायक नहीं रह गया है। छह परिवारों ने शनिवार को घर छोड़ा था। गांव में इस समय 27 परिवार रहते हैं।
1994 से कुलथम भूस्खलन की मार झेल रहा है। हर बरसात में कुलथम में पड़ी दरारें गहरी और चौड़ी हो जाती हैं। वहां के लोगों को सुरक्षित स्थानों में जाना पड़ता है। 1994 से अब तक गांव के 39 परिवारों पर जमीन पर पड़ रही दरारें भारी पड़ी है। इन लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। इनमें से छह परिवारों ने शनिवार को ही घर छोड़ा था। गांव में इस समय 27 परिवार रहते हैं। सभी पर आपदा की तलवार लटकी है।
जमीन में पड़ी दरारें कभी भी गांव के आवासीय क्षेत्र को तबाह कर सकती है। ग्रामीण विशन सिंह बताते हैं कि कुलथम का एकमात्र उपचार विस्थापन है। सरकार हर साल विस्थापन का भरोसा दिलाती है, लेकिन गांव के लोगों का विस्थापन नहीं हो पाता। गांव के लोग बरसात का सीजन नजदीक आते ही सिहर उठते हैं। बरसात में गांव, घर छोड़ना पड़ता है। बरसात थमते ही फिर उन्हीं खतरे की जद में आए मकानों में रहना पड़ता है।
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1994 से कुलथम भूस्खलन की मार झेल रहा है। हर बरसात में कुलथम में पड़ी दरारें गहरी और चौड़ी हो जाती हैं। वहां के लोगों को सुरक्षित स्थानों में जाना पड़ता है। 1994 से अब तक गांव के 39 परिवारों पर जमीन पर पड़ रही दरारें भारी पड़ी है। इन लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। इनमें से छह परिवारों ने शनिवार को ही घर छोड़ा था। गांव में इस समय 27 परिवार रहते हैं। सभी पर आपदा की तलवार लटकी है।
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जमीन में पड़ी दरारें कभी भी गांव के आवासीय क्षेत्र को तबाह कर सकती है। ग्रामीण विशन सिंह बताते हैं कि कुलथम का एकमात्र उपचार विस्थापन है। सरकार हर साल विस्थापन का भरोसा दिलाती है, लेकिन गांव के लोगों का विस्थापन नहीं हो पाता। गांव के लोग बरसात का सीजन नजदीक आते ही सिहर उठते हैं। बरसात में गांव, घर छोड़ना पड़ता है। बरसात थमते ही फिर उन्हीं खतरे की जद में आए मकानों में रहना पड़ता है।
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