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थामरीकुंड का 75 फीसदी हिस्सा जमा

Tue, 17 Jan 2017 10:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Tue, 17 Jan 2017 10:31 PM IST
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75 per cent of deposits Thomrikund
थामरीकुंड का 75 फीसदी हिस्सा जमा - फोटो : अमर उजाला
 समुद्र सतह से 8500 फीट की ऊंचाई पर स्थित 300 मीटर ब्यास वाला थामरीकुंड का 75 फीसदी हिस्सा जम गया है। मंगलवार को ट्रैकिंग दल ने थामरीकुंड का दौरा किया तो वहां के अद्भुत नजारे को देखकर वह उत्साहित हो गए। थामरीकुंड की एक खासियत यह भी है कि यहां से एक तरफ पंचाचूली की पूरी श्रृंखला नजर आती है तो दूसरी ओर समकोट, कोटाखड़िक के गांवों का रमणीक नजारा दिखता है।
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थामरीकुंड के आसपास घने जंगल हैं, लेकिन सबसे खास बात यह है कि इन पेड़ों की एक भी पत्ती झील में गिरी हुई नजर नहीं आती। 70 के दशक तक थामरीकुंड के आसपास रिंगाल की प्रजाति के घने वृक्ष थे, लेकिन लोगों ने इन पौधों को व्यावसायिक उपयोग के लिए काट दिया। मुनस्यारी से बेटुलीधार के रास्ते जाने पर करीब एक घंटे में थामरीकुंड पहुंचा जा सकता है। गर्मियों में झील का साफ पानी लोगों को आकृष्ट करता है तो जाड़ों में जमी हुई झील ज्यादा आकर्षक लगती है।
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मोनाल संस्था के सचिव सुरेंद्र पंवार के नेतृत्व में थामरीकुंड पहुंचे ट्रैकरों ने बताया कि झील के 75 फीसदी हिस्सा जम गया है, जबकि 25 फीसदी हिस्से में भी बर्फ है लेकिन उसमें चल पाना संभव नहीं रहता। क्योंकि उतने हिस्से में बर्फ अभी कच्ची दिखती है। सुरेंद्र पंवार के साथ गए मनोज झैक्वान, जगदीश भट्ट, वीरेंद्र दरियाल और दीपक पंवार ने बताया कि इस झील के सहारे मुनस्यारी के पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है। सबसे पहले ट्रैकिंग रूट को ठीक करने की जरूरत है। 
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जंगली जानवर भी नजर आए
थामरीकुंड के आसपास ट्रैकरों के दल को कई जानवर और पक्षी नजर आए। इनमें मुख्य रूप घुरड़, मोनाल शामिल हैं। यह जानवर और पक्षी हमेशा इसी जंगल में रहते हैं और लोगों को देखकर भाग जाते हैं। यह जानवर झील के पानी से ही अपनी प्यास बुझाया करते हैं।



शिकारियों की सक्रियता भी दिखी
थामरीकुंड के आसपास अवैध शिकारियों की सक्रियता भी नजर आई है। जंगली जानवरों के शिकार के लिए शिकारी कई जगह मोर्चा बना देते हैं। जानवरों और पक्षियों को घेरकर वह मौत के घाट उतार देते हैं। वन विभाग के कर्मचारी इस इलाके तक भी नहीं पहुंच पाते।
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