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मरीज को उपचार के लिए 20 किमी डोली में लाना बनी नियति
Updated Mon, 17 Sep 2018 10:49 PM IST
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पिथौरागढ़। सीमांत जनपद के कनार गांव तक आजादी के सात दशक बीतने के बाद भी सड़क नहीं बन सकी है। किसी ग्रामीण के बीमार होने पर यहां के लोगों को मरीज को डोली में रखकर 20 किमी दूर बरम पहुंचाना पड़ता है।
रविवार को कनार गांव निवासी मान सिंह की पत्नी माली देवी की तबियत खराब हो गई। ग्रामीण युवाओं ने उन्हें उपचार के लिए डोली में रखकर उबड़-खाबड़ मार्ग से बरम पहुंचाया। गांव के युवा सामाजिक कार्यकर्ता जगत सिंह का कहना है कि आज तक भी उनके गांव के लिए सड़क नहीं बन सकी है।
लोगों को पैदल ही आवाजाही करनी पड़ती है। दुर्घटना या अचानक बीमार होने पर ग्रामीण को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं होता है। हर माह किसी न किसी बीमार या घायल को डोली में रखकर बरम पहुंचाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि आपदा के कारण पूरा गांव भूस्खलन की जद में है। सड़क और सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास के लिए शासन-प्रशासन से आज तक केवल कोरे आश्वासन मिले हैं।
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रविवार को कनार गांव निवासी मान सिंह की पत्नी माली देवी की तबियत खराब हो गई। ग्रामीण युवाओं ने उन्हें उपचार के लिए डोली में रखकर उबड़-खाबड़ मार्ग से बरम पहुंचाया। गांव के युवा सामाजिक कार्यकर्ता जगत सिंह का कहना है कि आज तक भी उनके गांव के लिए सड़क नहीं बन सकी है।
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लोगों को पैदल ही आवाजाही करनी पड़ती है। दुर्घटना या अचानक बीमार होने पर ग्रामीण को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं होता है। हर माह किसी न किसी बीमार या घायल को डोली में रखकर बरम पहुंचाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि आपदा के कारण पूरा गांव भूस्खलन की जद में है। सड़क और सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास के लिए शासन-प्रशासन से आज तक केवल कोरे आश्वासन मिले हैं।
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