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जिले की छह नर्सरी के विकास को मिलेंगे 84 लाख
Updated Sun, 06 May 2018 10:53 PM IST
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पिथौरागढ़। केंद्र सरकार की नर्सरी विकास परियोजना के तहत जिले की छह नर्सरी का चयन किया गया है। चयनित नर्सरी की मरम्मत और विकास के साथ ही जल प्रबंधन की योजनाएं तैयारी की जाएंगी। इससे किसानों को आसानी से उन्नत प्रजाति के पौधे मिलेंगे। इससे उनकी आय में इजाफा होगा। नर्सरी विकास की डीपीआर को मंजूरी मिल गई है। इसके लिए नाबार्ड 84 लाख रुपये देगा।
जिले में सालाना 40 हजार मीट्रिक टन फलों का उत्पादन होता है। 25 हजार से अधिक किसान फलोत्पादन से जुड़े हैं। इसके इतर जिले में उद्यान विभाग की साठ के दशक में बनी नर्सरी बदहाली के दौर से गुजर रही हैं। नर्सरी सिंचाई के संसाधनों की कमी से भी जूझ रही हैं। इससे किसानों को नर्सरी का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस बीच केंद्र ने नर्सरी विकास परियोजना के तहत जिले की छह नर्सरी का चयन किया है।
योजना के तहत पुनर्निर्माण और निर्माण दोनों कार्य होंगे। नर्सरी की चहारदीवारी, स्टोर हाउस की मरम्मत के साथ ही सिंचाई सुविधा के लिए टैंक बनाए जाएंगे। जल स्रोत विकसित किए जाएंगे। नर्सरी तक नई पाइप लाइन बिछाने के साथ ही पुरानी लाइनों की मरम्मत की जाएगी। हर नर्सरी में रेन वाटर हार्वेस्टिंग योजना बनाई जाएगी। इस योजना की डीपीआर को केंद्र की मंजूरी मिल गई है।
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इन नर्सरी का होगा विकास
मूनाकोट, भट्यूड़ा, विषाड़, बेड़ीनाग, कनालीछीना, क्वीटी।
नर्सरी विकास की योजना पर काम शुरू हो गया है। इसके तहत विभिन्न कार्य योजनाओं के इस्टीमेट बनाए जा रहे हैं। जल्द ही आरईएस काम शुरू कर देगा। जल प्रबंधन के लिए जल संस्थान से कार्य कराएं जाएंगे। -डॉ. मीनाक्षी जोशी, मुख्य उद्यान अधिकारी, पिथौरागढ़
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जिले में सालाना 40 हजार मीट्रिक टन फलों का उत्पादन होता है। 25 हजार से अधिक किसान फलोत्पादन से जुड़े हैं। इसके इतर जिले में उद्यान विभाग की साठ के दशक में बनी नर्सरी बदहाली के दौर से गुजर रही हैं। नर्सरी सिंचाई के संसाधनों की कमी से भी जूझ रही हैं। इससे किसानों को नर्सरी का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस बीच केंद्र ने नर्सरी विकास परियोजना के तहत जिले की छह नर्सरी का चयन किया है।
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योजना के तहत पुनर्निर्माण और निर्माण दोनों कार्य होंगे। नर्सरी की चहारदीवारी, स्टोर हाउस की मरम्मत के साथ ही सिंचाई सुविधा के लिए टैंक बनाए जाएंगे। जल स्रोत विकसित किए जाएंगे। नर्सरी तक नई पाइप लाइन बिछाने के साथ ही पुरानी लाइनों की मरम्मत की जाएगी। हर नर्सरी में रेन वाटर हार्वेस्टिंग योजना बनाई जाएगी। इस योजना की डीपीआर को केंद्र की मंजूरी मिल गई है।
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इन नर्सरी का होगा विकास
मूनाकोट, भट्यूड़ा, विषाड़, बेड़ीनाग, कनालीछीना, क्वीटी।
नर्सरी विकास की योजना पर काम शुरू हो गया है। इसके तहत विभिन्न कार्य योजनाओं के इस्टीमेट बनाए जा रहे हैं। जल्द ही आरईएस काम शुरू कर देगा। जल प्रबंधन के लिए जल संस्थान से कार्य कराएं जाएंगे। -डॉ. मीनाक्षी जोशी, मुख्य उद्यान अधिकारी, पिथौरागढ़