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बोर्ड सीएचसी का और सुविधाएं पीएचसी की
Updated Tue, 31 Oct 2017 10:47 PM IST
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कनालीछीना (पिथौरागढ़)। सरकारें जनसुविधाओं के प्रति कितनी सजग रहती हैं, इसका अंदाजा कनालीछीना के स्वास्थ्य केंद्र को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है। सरकार ने कनालीछीना में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को मंजूरी दी, भवन बनाया और मुख्यमंत्री ने भवन का लोकार्पण किया, लेकिन सरकार अस्पताल के लिए पद सृजित करना भूल गई। हालात यह हैं कि आज भी कनालीछीना में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ही संचालित हो रहा है। बोर्ड अवश्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का लगा हुआ है।
दो करोड़ रुपये की लागत से बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के भवन का लोकार्पण 24 अप्रैल 2010 को तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने किया। निशंक ने अस्पताल में जल्द डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की तैनाती करने की घोषणा की थी, लेकिन सात साल बाद भी अस्पताल में डॉक्टरों की तैनाती नहीं हुई। अब भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की सुविधा ही 40,000 की आबादी को मिल रही है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी चार चिकित्सकों के स्थान पर केवल एक चिकित्सक तैनात है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. ऊषा गुंज्याल कहती हैं कि स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा मिला है, तभी भवन का निर्माण हुआ है। पद सृजित नहीं होने से तैनाती नहीं हो पा रही है।
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जनता के साथ धोखा
ख्वांतड़ी के प्रधान केदार सामंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शुरू न होने को जनता के साथ धोखा बताते हैं। कहते हैं कि ऐसा मजाक किसी के साथ नहीं किया जाना चाहिए।
पद सृजित होने चाहिए थे
चौकी के प्रधान शंकर राम कहते हैं कि स्वास्थ्य केंद्र के भवन का लोकार्पण करने से पहले डॉक्टर और अन्य स्टाफ के पद सृजित होने चाहिए थे। केवल भवन बना देने और बोर्ड लगा देने से जनता को लाभ नहीं मिलने वाला।
पिथौरागढ़, हल्द्वानी पर निर्भरता
जिनगाल निवासी प्रयाग दत्त पांडे कहते हैं कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शुरू न होने से लोगों को छोटे सी बीमारी के लिए भी पिथौरागढ़ और हल्द्वानी जाना पड़ता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जल्द शुरू होना चाहिए।
मामला स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया जाएगा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों और अन्य स्टाफ के पद सृजित कराए जाएंगे। -विशन सिंह चुफाल, विधायक
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दो करोड़ रुपये की लागत से बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के भवन का लोकार्पण 24 अप्रैल 2010 को तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने किया। निशंक ने अस्पताल में जल्द डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की तैनाती करने की घोषणा की थी, लेकिन सात साल बाद भी अस्पताल में डॉक्टरों की तैनाती नहीं हुई। अब भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की सुविधा ही 40,000 की आबादी को मिल रही है।
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी चार चिकित्सकों के स्थान पर केवल एक चिकित्सक तैनात है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. ऊषा गुंज्याल कहती हैं कि स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा मिला है, तभी भवन का निर्माण हुआ है। पद सृजित नहीं होने से तैनाती नहीं हो पा रही है।
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जनता के साथ धोखा
ख्वांतड़ी के प्रधान केदार सामंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शुरू न होने को जनता के साथ धोखा बताते हैं। कहते हैं कि ऐसा मजाक किसी के साथ नहीं किया जाना चाहिए।
पद सृजित होने चाहिए थे
चौकी के प्रधान शंकर राम कहते हैं कि स्वास्थ्य केंद्र के भवन का लोकार्पण करने से पहले डॉक्टर और अन्य स्टाफ के पद सृजित होने चाहिए थे। केवल भवन बना देने और बोर्ड लगा देने से जनता को लाभ नहीं मिलने वाला।
पिथौरागढ़, हल्द्वानी पर निर्भरता
जिनगाल निवासी प्रयाग दत्त पांडे कहते हैं कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शुरू न होने से लोगों को छोटे सी बीमारी के लिए भी पिथौरागढ़ और हल्द्वानी जाना पड़ता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जल्द शुरू होना चाहिए।
मामला स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया जाएगा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों और अन्य स्टाफ के पद सृजित कराए जाएंगे। -विशन सिंह चुफाल, विधायक