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हजारों छात्रों की नाराजगी भाजपा पर पड़ सकती है भारी

Haldwani Bureauहल्द्वानी ब्यूरो Updated Sun, 17 Mar 2019 10:42 PM IST
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पिथौरागढ़। सीमांत पिथौरागढ़ जिले में पिछले 48 सालों से उठ रही अलग विश्वविद्यालय की मांग इस बार भी पूरी नहीं हो सकी। ऐन लोक सभा चुनावों से पहले आंदोलन की शुरुआत कर चुके छात्र इस मुद्दे पर मुखर हैं। लोकसभा चुनावों में उम्मीदवारों को उनके तीखे सवालों से जूझना पड़ सकता है। युवाओं के लिए चुनाव में यह प्रमुख मुद्दा हुआ तो सियासी दलों को नफा-नुकसान का आकलन नए सिरे से करना पड़ सकता है।
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कुमाऊं और गढ़वाल विश्वविद्यालय बनने से पहले यहां के महाविद्यालय आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध थे। वर्ष 1972 में कुमाऊं और गढ़वाल में अलग विश्वविद्यालय की मांग पहली बार उठी थी, जिसकी चिंगारी चीन और नेपाल सीमा पर स्थित पिथौरागढ़ जिले तक भी पहुंची। इस मांग को लेकर पिथौरागढ़ में आंदोलन ने इतना उग्र रूप ले लिया कि पुलिस को प्रदर्शनकारी छात्रों पर गोलियां तक चलानी पड़ी थीं, जिसमें एक छात्र नेता और एक नेपाली मजदूर की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 1973 में कुमाऊं और गढ़वाल विश्वविद्यालयों की घोषणा कर दी।

कुमाऊं विश्वविद्यालय का मुख्यालय नैनीताल में स्थापित होने के बाद आंदोलन तो थमा लेकिन इस सीमांत जिले से छात्र-छात्राओं की दौड़ जारी रही। अंक तालिकाओं में सुधार हो या फिर डिग्री लाना हो, पिथौरागढ़ से 180 किलोमीटर दूर नैनीताल जाना पड़ता है। धारचूला और मुनस्यारी जैसे दुर्गम इलाकों के छात्रों को इसमें तीन दिन का समय लगता है। इस समस्या को देखते हुए समय-समय पर अलग विश्वविद्यालय की मांग उठती रही है।

राज्य गठन के बाद भी सत्ता में बारीबारी से काबिज होने वाली कांग्रेस और भाजपा सरकारों ने भी इस मांग को अनसुना ही किया। यहां तक पिथौरागढ़ डिग्री कालेज को कैंपस बनाने की मांग भी हाशिए में डाल दी।

दो माह पूर्व पिथौरागढ़ पीजी कालेज के छात्रसंघ ने अलग विश्वविद्यालय की मांग को लेकर आंदोलन की शुरुआत की थी। इस मांग को जिले के अन्य महाविद्यालयों के छात्रों के साथ ही अभिभावकों, कर्मचारी, व्यापारी, अधिवक्ता सहित तमाम संगठनों का भरपूर समर्थन भी मिला लेकिन मांग पूरी होना तो दूर इसके संकेत भी नहीं मिले हैं।

इस मुद्दे पर जनप्रतिनिधियों के रवैये से छात्रों में गुस्सा है। एलएसएम पीजी कालेज सहित जिले के सात महाविद्यालयों में लगभग 14 हजार की छात्र संख्या है। छात्रों की नाराजगी कहीं न कहीं सियासी समीकरण गड़बड़ा सकती है।

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