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पेयजल संकट से निपटने को खुद संभालनी होगी कमान

Tue, 20 Mar 2018 11:17 PM IST
Updated Tue, 20 Mar 2018 11:17 PM IST
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पेयजल संकट से निपटने को खुद संभालनी होगी कमान
पिथौरागढ़। सामूहिक प्रयास पेयजल संकट से निपटने में कारगर हो सकते हैं। बशर्ते सरकारी मशीनरी से लेकर आम लोगों को अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की प्रवृत्ति बदलनी होगी। संकट से निपटने के लिए हर किसी को खुद तो कमान संभालनी ही होगी। नई पीढ़ी को भी जागरूक करना होगा। घर से लेकर स्कूल, सरकारी, निजी दफ्तर, सामुदायिक, सार्वजनिक स्थलों पर जल संरक्षण की योजनाएं बनानी होंगी। इस मुहिम में पेड़ लगाने की अहम भूमिका रहेगी। स्वयंसेवी समूहों को आगे आना होगा।
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सीमांत यूथ मोर्चा के राकेश वर्मा कहते हैं कि स्रोतों के संरक्षण, संवर्द्धन और विकास के लिए ठोस योजनाएं बनानी होंगी। पेयजल संकट से निपटने में हम सभी को भी अपनी सोच बदलनी होगी। जल संरक्षण की सारी जिम्मेदारी सरकारी मशीनरी पर नहीं डाली जा सकती। हमें खुद जल संरक्षण की मुहिम में आगे आना होगा। पानी का असीमित उपभोग और बर्बादी रोकनी होगी। सामाजिक कार्यकर्ता कृष्णा कापड़ी कहते हैं कि अपने आसपास नौले, गधेरे और तालाबों को पुनर्जीवित करना होगा। प्राकृतिक स्रोतों के इर्दगिर्द पौधरोपण करना होगा। पेयजल स्रोतों की नियमित सफाई करने के साथ ही बच्चों को पानी बचाने ओर सहेजने की सीख देनी होगी। ग्राम सभा स्तर या मोहल्ला स्तर पर लोगों को जागरूक भी करना होगा।
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सामाजिक कार्यकर्ता जीवन ठाकुर कहते हैं कि भवन निर्माण में रेन वाटर हार्वेस्टिंग का प्रावधान है। इसके बावजूद लोग निर्माण में इसे नजरअंदाज कर रहे हैं। खुद सरकार रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का पालन नहीं कर रही। किसी भी सरकारी इमारत में इसका विकास नहीं किया गया। प्रशासन निर्माण को तभी स्वीकृति दे, जब रेन वाटर हार्वेस्टिंग भी शामिल हो। पेयजल समस्याग्रस्त क्षेत्रों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से पानी की योजनाएं चलाई जा सकती हैं।
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सरकार को बनानी होंगी नई हरित जल योजनाएं
संयुक्त राष्ट्र संघ की विश्व जल विकास रिपोर्ट-2018 के मुताबिक जलवायु परिवर्तन और बढ़ती आबादी लोगों की जल सुरक्षा को जोखिम में डालेगी। शुद्ध पेयजल संसाधनों की कमी के इतर पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। आने वाले कुछ सालों में ही कई क्षेत्रों में लोगों को साल के कुछ महीनों यानी गर्मी में पानी से महरूम रहना पड़ सकता है। इस रिपोर्ट में संभावित संकट से निपटने के लिए हरित जल योजनाएं बनाने पर जोर दिया गया है। ऐसे में सरकार को भी जल संरक्षण, संवर्द्धन और विकास के लिए हरित जल नीतियां बनानी होंगी।


संबंधित विभागों के साथ मिलकर जल संरक्षण की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। आमजन को जल संरक्षण की मुहिम में विभागों का साथ देने के लिए आगे आना चाहिए। पानी की बर्बादी रोकने और सहेजने में हम सबकी जिम्मेदारी है। -सी रविशंकर, डीएम, पिथौरागढ़
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