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कनालीछीना तहसील में शामिल करने की मांग मुखर
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कनालीछीना (पिथौरागढ़)। ख्वांतड़ी और कापड़ीगांव के ग्रामीणों ने कनालीछीना तहसील में शामिल करने की मांग मुखर कर दी है। ग्रामीणों का कहना है कि देवलथल तहसील में शामिल करने से उन्हें तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने शीघ्र कनालीछीना तहसील में शामिल नहीं करने पर आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी है।
मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में क्षेत्रवासियों ने कहा कि 2015 में कनालीछीना और देवलथल तहसीलों का गठन किया गया था। कनालीछीना से सटे होने के बावजूद ख्वांतड़ी और कापड़ीगांव गांवों को देवलथल तहसील में शामिल कर दिया गया। ग्रामीणों की कोई राय नहीं ली गई, जबकि इन गांवों से कनालीछीना की दूरी मात्र चार किमी और देवलथल की दूरी 12 किमी है।
सभी ग्रामीण बैंक, पोस्टआफिस, स्कूल और बाजार के लिए कनालीछीना पर ही निर्भर हैं। देवलथल तहसील में शामिल करने से उन्हें प्रमाणपत्रों के लिए देवलथल की दौड़ लगानी पड़ती है। इस समय किसान पेंशन योजना के लिए देवलथल जाना पड़ रहा है। पटवारी के नहीं मिलने से बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा है कि यदि उन्हें कनालीछीना तहसील में शामिल नहीं किया गया तो आंदोलन किया जाएगा।
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ज्ञापन भेजने वालों में दरपान सिंह, विक्रम सिंह, उमेद सिंह, राम सिंह, दान सिंह, लीला राम, शेर राम, जमन राम, सुरेश राम, गोविंद राम आदि शामिल थे।
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मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में क्षेत्रवासियों ने कहा कि 2015 में कनालीछीना और देवलथल तहसीलों का गठन किया गया था। कनालीछीना से सटे होने के बावजूद ख्वांतड़ी और कापड़ीगांव गांवों को देवलथल तहसील में शामिल कर दिया गया। ग्रामीणों की कोई राय नहीं ली गई, जबकि इन गांवों से कनालीछीना की दूरी मात्र चार किमी और देवलथल की दूरी 12 किमी है।
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सभी ग्रामीण बैंक, पोस्टआफिस, स्कूल और बाजार के लिए कनालीछीना पर ही निर्भर हैं। देवलथल तहसील में शामिल करने से उन्हें प्रमाणपत्रों के लिए देवलथल की दौड़ लगानी पड़ती है। इस समय किसान पेंशन योजना के लिए देवलथल जाना पड़ रहा है। पटवारी के नहीं मिलने से बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा है कि यदि उन्हें कनालीछीना तहसील में शामिल नहीं किया गया तो आंदोलन किया जाएगा।
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ज्ञापन भेजने वालों में दरपान सिंह, विक्रम सिंह, उमेद सिंह, राम सिंह, दान सिंह, लीला राम, शेर राम, जमन राम, सुरेश राम, गोविंद राम आदि शामिल थे।